Jharkhand: झारखंड में बिजली उत्पादन और खपत को लेकर नियम और सख्त होने वाले हैं. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली ग्रिड को स्थिर रखने के लिए नए ड्राफ्ट नियम तैयार किए हैं. प्रस्तावित नियमों के तहत तय शेड्यूल से ज्यादा बिजली लेने या ग्रिड में निर्धारित मात्रा से अधिक बिजली डालने पर संबंधित संस्थानों को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है.
ग्रिड संतुलन बनाए रखने पर जोर
आयोग का कहना है कि बिजली की मांग और उत्पादन में अचानक अंतर आने से ग्रिड की फ्रीक्वेंसी प्रभावित हो सकती है. इसका असर पूरी विद्युत व्यवस्था पर पड़ता है. इसी समस्या से निपटने के लिए आयोग ने मार्केट-लिंक्ड डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म लागू करने का प्रस्ताव रखा है. इसमें शेड्यूल और वास्तविक बिजली प्रवाह के बीच अंतर के आधार पर चार्ज तय होगा.
उत्पादन में तय सीमा से ज्यादा अंतर पर कार्रवाई
सामान्य बिजली उत्पादकों के लिए डेविएशन की एक सीमा तय करने का प्रस्ताव है. यह सीमा 10 फीसदी या 100 मेगावाट में से जो कम होगा, उतनी रहेगी. निर्धारित सीमा से अधिक विचलन होने पर संबंधित उत्पादक पर अतिरिक्त वित्तीय दंड लगाया जा सकेगा. रनिंग-ऑफ-द-रिवर हाइड्रो प्रोजेक्ट और कचरे से बिजली बनाने वाली इकाइयों के लिए अलग प्रावधान रखे गए हैं. इनमें प्राकृतिक परिस्थितियों और उत्पादन की व्यावहारिक सीमाओं को ध्यान में रखा जाएगा.
ज्यादा बिजली लेने पर 200 फीसदी तक भुगतान
डिस्कॉम, ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं और कैप्टिव पावर प्लांट जैसे खरीदारों के लिए भी डेविएशन की सीमा तय होगी. यदि कोई खरीदार तय सीमा से अधिक बिजली लेता है, तो उसे सामान्य दर का 200 फीसदी तक भुगतान करना पड़ सकता है. वहीं, तय मात्रा से कम बिजली लेने पर कुछ परिस्थितियों में प्रोत्साहन या रिफंड का प्रावधान रखा गया है. इसके लिए निर्धारित फ्रीक्वेंसी बैंड में रहना जरूरी होगा.
छह टाइम-ब्लॉक में साइन बदलना जरूरी
नए प्रस्ताव में डेविएशन के साइन को लेकर भी सख्त नियम रखा गया है. खरीदार और विक्रेता को हर छह टाइम-ब्लॉक के दौरान कम से कम एक बार अपने डेविएशन का रुख बदलना होगा. यानी पॉजिटिव डेविएशन के बाद नेगेटिव या नेगेटिव के बाद पॉजिटिव डेविएशन करना होगा. लगातार एक ही दिशा में विचलन पाए जाने और साइन नहीं बदलने पर संबंधित इकाई पर 20 फीसदी अतिरिक्त चार्ज लगाया जाएगा.
सात दिन में करना होगा भुगतान
एसएलडीसी हर सात दिनों के आधार पर डेविएशन चार्ज का स्टेटमेंट तैयार करेगा. स्टेटमेंट जारी होने के बाद संबंधित संस्था को सात दिनों के भीतर भुगतान करना होगा. देरी होने पर हर दिन 0.04 फीसदी लेट पेमेंट सरचार्ज देना पड़ेगा.
डिफॉल्ट पर बैंक गारंटी का प्रावधान
भुगतान में लगातार चूक करने वाली इकाइयों के लिए भी कड़े प्रावधान प्रस्तावित हैं. ऐसी इकाइयों को अपनी औसत साप्ताहिक देनदारी की 110 फीसदी राशि के बराबर बैंक गारंटी या लेटर ऑफ क्रेडिट देना होगा. समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में एसएलडीसी लेटर ऑफ क्रेडिट को भुना सकता है.
आपदा या ग्रिड फेल होने पर राहत
प्राकृतिक आपदा या ग्रिड फेल होने जैसी परिस्थितियों में प्रभावित समय के लिए डेविएशन चार्ज नहीं लिया जाएगा. ऐसे समय में वास्तविक बिजली उत्पादन और खपत को ही संबंधित शेड्यूल माना जाएगा. वहीं, राज्य के भीतर ट्रांसमिशन लॉस की गणना आयोग द्वारा स्वीकृत प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी. इसका उद्देश्य बिजली के हिसाब-किताब में पारदर्शिता बनाए रखना है.