MMDR Amendment Bill: खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी समर्थन मांगा है. उन्होंने पत्र लिखकर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की अपील की है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह लड़ाई केवल झारखंड के राजस्व की नहीं, बल्कि देश के संघीय ढांचे और राज्यों के संवैधानिक अधिकारों की है.
धारा 9D पर जताई आपत्ति
हेमंत सोरेन ने पत्र में कहा कि प्रस्तावित धारा 9D से राज्यों का अधिकार सीमित हो सकता है. उनके मुताबिक, इस प्रावधान के बाद राज्य सरकारें खनिज वाली जमीन पर टैक्स, सेस या अन्य लेवी अपनी शर्तों पर नहीं लगा सकेंगी. इससे राज्यों की आर्थिक ताकत कमजोर होगी और अपने संसाधनों पर फैसला लेने की क्षमता भी घटेगी.
पहले PM और राष्ट्रपति को भी लिख चुके हैं पत्र
मुख्यमंत्री ने बताया कि वह पहले प्रधानमंत्री को इस विषय पर पत्र भेज चुके हैं. इसके बाद राष्ट्रपति को भी झारखंड की चिंताओं से अवगत कराया गया. अब उन्होंने राहुल गांधी से संसद और राष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को उठाने की अपील की है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
पत्र में हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अदालत ने राज्यों को खनिज युक्त जमीन पर कर लगाने का अधिकार माना था. इसी आधार पर झारखंड ने खनिज युक्त भूमि उपकर अधिनियम, 2024 बनाया था.
झारखंड के संसाधनों से देश का विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर और यूरेनियम ने देश के औद्योगिक विकास में बड़ी भूमिका निभाई है. लेकिन खनन का सबसे ज्यादा असर आदिवासी और खनन प्रभावित इलाकों के लोगों ने झेला है. विस्थापन, प्रदूषण और रोजगार का नुकसान आज भी बड़ी चुनौती है.
13 हजार करोड़ से ज्यादा आय का अनुमान
मुख्यमंत्री के अनुसार, खनिज भूमि उपकर से:
- 2024-25 में 1,379 करोड़ रुपये मिले
- 2025-26 में 7,488 करोड़ रुपये मिले
- 2026-27 में 13,215 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है
उन्होंने कहा कि इसी राशि से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण विकास की योजनाएं चलती हैं.
राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन की अपील
हेमंत सोरेन ने राहुल गांधी से कहा कि यह मुद्दा सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है. अगर राज्यों के खनिज अधिकार कमजोर होते हैं तो इसका असर दूसरे खनिज उत्पादक राज्यों पर भी पड़ेगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए विपक्ष इस मुद्दे पर झारखंड का साथ देगा.