Misir Besra Bodyguard: झारखंड पुलिस के सामने 28 जुलाई को आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सली इतवारी हांसदा उर्फ सोनोत उर्फ शनिचरा की इलाज के दौरान मौत हो गई. उसने 13 अगस्त की सुबह रिम्स रांची में अंतिम सांस ली. 26 वर्षीय इतवारी हांसदा कभी एक करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा का बॉडीगार्ड था. आत्मसमर्पण के समय उसने बताया था कि सारंडा में हुई मुठभेड़ के बाद उसकी जिंदगी बदल गई थी.
मुठभेड़ के बाद टूटा भरोसा
इतवारी ने बताया था कि 6 नवंबर 2025 को वह मिसिर बेसरा के साथ सारंडा जंगल में मौजूद था. इसी दौरान सुरक्षा बलों से मुठभेड़ हुई और उसे गोली लग गई. उसका आरोप था कि घायल होने के बाद मिसिर बेसरा उसे वहीं छोड़कर चला गया. न इलाज कराया और न ही हालचाल पूछा. इसी घटना के बाद उसने माओवाद छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया.
जेल में बिगड़ी तबीयत
गिरिडीह के मधुबन थाना क्षेत्र के मोहनपुर गांव निवासी इतवारी को 31 जुलाई को हजारीबाग ओपन जेल लाया गया था. जेल पहुंचने के दो दिन बाद उसे तेज बुखार और कमजोरी की शिकायत हुई. जेल डॉक्टर की सलाह पर उसे शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया.
रिम्स में चल रहा था इलाज
हजारीबाग में हालत में सुधार नहीं होने पर 4 अगस्त को मेडिकल बोर्ड बनाया गया. बोर्ड की सिफारिश पर 7 अगस्त को उसे रिम्स रांची रेफर किया गया. कई दिनों तक इलाज चला, लेकिन 13 अगस्त सुबह 10:29 बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.