Laughing Buddha: लाफिंग बुद्धा की मुस्कुराती हुई मूर्ति आपने घर, ऑफिस या दुकानों में जरूर देखी होगी. फेंगशुई में इसे खुशहाली, सुख-शांति और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. भारत में जिस तरह कुबेर को धन और समृद्धि से जोड़ा जाता है, उसी तरह चीन में लाफिंग बुद्धा को शुभता का प्रतीक माना जाता है. हालांकि, इससे जुड़ी बातें धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं.
कौन थे लाफिंग बुद्धा?
मान्यता के अनुसार, लाफिंग बुद्धा का नाम होतेई था. उन्हें 10वीं सदी का एक खुशमिजाज बौद्ध भिक्षु बताया जाता है. कहा जाता है कि वे हमेशा मुस्कुराते रहते थे और लोगों को भी खुश रखने की कोशिश करते थे. इसी वजह से उनकी पहचान लाफिंग बुद्धा के रूप में बन गई.
एक अन्य मान्यता में उन्हें चीन के भिक्षु पुताइ से जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि पुताइ को लोगों के साथ रहना और उन्हें हंसाना पसंद था. उनका बड़ा पेट संतोष और खुशहाली का प्रतीक माना गया. समय के साथ उनकी मूर्ति को सौभाग्य और समृद्धि से जोड़कर देखा जाने लगा.
लाफिंग बुद्धा खरीदें या गिफ्ट लें?
फेंगशुई की मान्यता के अनुसार, किसी दूसरे व्यक्ति से गिफ्ट में मिला लाफिंग बुद्धा शुभ माना जाता है. खासतौर पर थैला या सोने के सिक्के वाला लाफिंग बुद्धा समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. हालांकि, इसे खुद खरीदना अशुभ है, ऐसी मान्यता का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. इसलिए इसे रखने के लिए किसी खास दिन का होना जरूरी नहीं माना जाना चाहिए.
किस दिशा में रखें लाफिंग बुद्धा?
मान्यता के अनुसार, लाफिंग बुद्धा को पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है. घर के मुख्य दरवाजे के सामने अंदर की ओर इसे रखा जा सकता है, ताकि प्रवेश करते समय यह आसानी से दिखाई दे. इसे साफ और ऊंची जगह पर रखना बेहतर माना जाता है.
किन जगहों पर न रखें?
लाफिंग बुद्धा को रसोई, बाथरूम, डाइनिंग टेबल या सीधे जमीन पर रखने से बचने की सलाह दी जाती है. इसे किसी साफ टेबल, स्टूल या काउंटर पर रखना चाहिए. दुकान में इसे मुख्य प्रवेश द्वार के सामने किसी साफ और ऊंची जगह पर रखने की मान्यता है, जहां ग्राहकों की नजर आसानी से पड़ सके.
वास्तु और फेंगशुई की मान्यताओं में पीतल, तांबा, चांदी या सुनहरी परत वाली लाफिंग बुद्धा की मूर्तियों को शुभ माना जाता है. अलग-अलग मुद्राओं वाली मूर्तियों को अलग-अलग अर्थों से जोड़ा जाता है.