Jamshedpur Assistant Police: झारखंड में अनुबंध पर काम कर रहे सहायक पुलिसकर्मियों की नौकरी को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है. राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों में तैनात रहे 2500 सहायक पुलिसकर्मियों में अब करीब 1800 कर्मी बचे हैं. इन कर्मियों का अनुबंध जुलाई 2026 में खत्म हो चुका है. इसके बाद पूर्वी सिंहभूम के 72 सहायक पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन वापस बुलाने का आदेश जारी किया गया है.
22 महिला और 50 पुरुष जवान वापस बुलाए गए
पूर्वी सिंहभूम SSP कार्यालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि 13 अगस्त को सहायक पुलिसकर्मियों की सेवा के नौ साल पूरे हो गए. सेवा विस्तार को लेकर 4 अगस्त को कोल्हान DIG कार्यालय से पत्राचार किया गया था. हालांकि, अभी तक सेवा बढ़ाने का कोई आदेश नहीं मिला है. इसके बाद जिले के सभी थाना प्रभारियों और घाटशिला यातायात प्रभारी को 72 सहायक पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन में वापस बुलाने का निर्देश दिया गया है. इनमें 22 महिला और 50 पुरुष कर्मी शामिल हैं.
सहायक पुलिस संघ ने जताई चिंता
झारखंड सहायक पुलिसकर्मी संघ के सचिव विवेकानंद गुप्ता ने कहा कि कर्मियों ने अपनी नौकरी के कई साल इसी सेवा में लगा दिए हैं. अब उम्र ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी है कि दूसरी सरकारी नौकरी की तैयारी करना भी मुश्किल है. उन्होंने कहा कि अगर सेवा समाप्त कर दी जाती है तो बड़ी संख्या में कर्मियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा. संघ की ओर से अनुबंध बढ़ाने, आरक्षी संवर्ग में समायोजन और नियमित नियुक्ति की मांग की जा रही है.
वित्त मंत्री को सौंप चुके हैं मांग पत्र
संघ के मुताबिक, करीब 1800 सहायक पुलिसकर्मियों की मांगों को लेकर कुछ दिन पहले वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को मांग पत्र दिया गया था. संघ का कहना है कि इस दौरान सेवा को लेकर आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कोई ठोस आदेश जारी नहीं हुआ है.
2017 में हुई थी सहायक पुलिसकर्मियों की बहाली
सहायक पुलिसकर्मियों की नियुक्ति वर्ष 2017 में राज्य के 12 जिलों में की गई थी. इनमें पश्चिमी सिंहभूम, चतरा, पलामू, गढ़वा, दुमका, लातेहार, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, लोहरदगा, पूर्वी सिंहभूम और गिरिडीह शामिल हैं. नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से इन कर्मियों को अनुबंध पर तैनात किया गया था.
वेतन को लेकर शिकायत
सहायक पुलिस संघ का दावा है कि उनसे जिला पुलिस के जवानों की तरह ही कई तरह की ड्यूटी ली जाती है. गश्त और एलआरपी के अलावा कार्यालय का काम भी कराया जाता है. पर्व-त्योहार के दौरान ट्रैफिक ड्यूटी में भी उनकी तैनाती होती है. इसके बावजूद संघ के अनुसार उन्हें करीब 13 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है. संघ का कहना है कि काम और जिम्मेदारी के हिसाब से वेतन और सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं.
छत्तीसगढ़ की तर्ज पर स्थायी करने की मांग
सहायक पुलिसकर्मी अब अपनी सेवा को स्थायी करने की मांग कर रहे हैं. संघ ने इसके लिए छत्तीसगढ़ का उदाहरण दिया है. संघ के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में सहायक आरक्षकों को डिस्ट्रिक्ट स्ट्राइक फोर्स संवर्ग में शामिल कर स्थायी किया गया है. वहां वेतनमान भी निर्धारित किया गया है. सहायक पुलिसकर्मियों का कहना है कि झारखंड और छत्तीसगढ़ का गठन एक ही समय हुआ था. ऐसे में उन्हें भी स्थायी सेवा का लाभ मिलना चाहिए. संघ ने राज्य के होमगार्डों के वेतन में हुई बढ़ोतरी का भी हवाला दिया है. उनका कहना है कि सरकार को सहायक पुलिसकर्मियों के भविष्य को लेकर जल्द स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए.