Bokaro News: केंद्र सरकार की ओर से खान एवं खनिज संशोधित अधिनियम 2026 लागू किए जाने के बाद झारखंड में इसे लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने राज्य के खनिज हितों से जुड़े मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर अलग-अलग जिलों में बैठकें कर कार्यकर्ताओं और नेताओं से राय ली जा रही है.
इसी क्रम में बोकारो के जैनामोड़ स्थित एक निजी होटल में झामुमो की अहम बैठक आयोजित की गई. बैठक में जिलाध्यक्ष रतन लाल मांझी, राज्य के मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो, चंदनक्यारी विधायक उमाकांत रजक समेत पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए. बैठक में केंद्र के नए खनिज कानून के संभावित प्रभाव और पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा की गई.
झामुमो ने कहा:- खनिज राजस्व प्रभावित हुआ तो विकास पर पड़ेगा असर
बैठक के बाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने केंद्र सरकार पर झारखंड के हितों को प्रभावित करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां से मिलने वाले खनिज राजस्व का राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है.
उन्होंने कहा कि यदि नए कानून के कारण खनिज संपदाओं से राज्य को मिलने वाला टैक्स और राजस्व प्रभावित होता है, तो इसका सीधा असर विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा. झामुमो का कहना है कि राज्य के खनिज संसाधनों पर झारखंड के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी.
जनमत संग्रह के बाद मुख्यमंत्री को दी जाएगी रिपोर्ट, फिर आंदोलन की तैयारी
योगेंद्र प्रसाद महतो ने कहा कि पार्टी पहले पूरे राज्य में कार्यकर्ताओं और लोगों से रायशुमारी करेगी. इसके बाद जनमत संग्रह के जरिए सामने आए विचारों से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अवगत कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार खनिज कानून को वापस नहीं लेती है, तो झामुमो आंदोलन का रास्ता अपनाएगा. पार्टी नेता ने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में झारखंड से खनिज संपदाओं के बाहर जाने पर रोक लगाने के लिए आंदोलन को तेज किया जाएगा. झामुमो नेताओं के अनुसार, आने वाले दिनों में राज्य के अन्य जिलों में भी बैठकें आयोजित की जाएंगी. इन बैठकों के जरिए पार्टी खनिज कानून को लेकर लोगों की राय जुटाने के साथ आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी.