Jharkhand News: लातेहार सिविल कोर्ट में हुई हिंसा की घटना से सबक लेते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के सभी जिलों में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता से भी सीधे जुड़ी हुई है।
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने वर्ष 2022 में लातेहार सिविल कोर्ट में हुई हिंसा से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि भविष्य में किसी बड़ी घटना का इंतजार किए बिना न्यायिक परिसरों की सुरक्षा को मजबूत किया जाना जरूरी है।
2022 में कोर्ट परिसर में हुई थी हिंसा
10 अक्टूबर 2022 को बड़ी संख्या में लोग लातेहार सिविल कोर्ट परिसर में घुस गए थे। इस दौरान तोड़फोड़ के साथ पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की घटना भी हुई थी। स्थिति बिगड़ने पर तत्कालीन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सुरक्षा के लिए एक कमरे में रखना पड़ा था।
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी मुद्दे पर विरोध या असहमति जताना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कोर्ट परिसर में हिंसा करना या न्यायिक कार्य में बाधा डालना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सभी जिलों में सुरक्षा बढ़ाने पर जोर
अदालत ने लातेहार कोर्ट की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष जताया। कोर्ट परिसर में हथियारबंद जवानों के साथ क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT), CCTV कैमरे और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य के अन्य जिलों में भी न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाए। अदालत ने हर न्यायिक अधिकारी को कम से कम एक बॉडीगार्ड और एक होमगार्ड उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।
40 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
इस मामले में 40 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निपटारा करते हुए उम्मीद जताई कि मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई को जल्द अंतिम परिणाम तक पहुंचाया जाएगा। अदालत की टिप्पणी के बाद अब राज्य के सभी न्यायिक परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और आवश्यक कदम उठाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।