Ranchi News: रंगदारी मांगने और फायरिंग करने के 12 साल पुराने मामले में आरोपी राजेश खलखो उर्फ राजेश उरांव को अदालत से बड़ी राहत मिली है. न्यायिक दंडाधिकारी एजेलिना जॉन की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में उन्हें बरी कर दिया. यह मामला रातू थाना में वर्ष 2014 में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है. शिकायत संतोष जायसवाल ने दर्ज कराई थी.
मोबाइल पर कॉल कर मांगी गई थी रंगदारी
एफआईआर के अनुसार, जनवरी 2014 की सुबह राजेश खलखो ने संतोष जायसवाल को मोबाइल पर फोन किया और रंगदारी की मांग की. उसी दिन दोपहर करीब 3 बजे आरोपी 9 से 10 साथियों के साथ संतोष के निर्माणाधीन मकान पर पहुंचा. वहां मौजूद मजदूरों से रंगदारी मांगी गई. मजदूरों ने कहा कि वे मालिक नहीं हैं और इस बारे में संतोष जायसवाल से बात करनी होगी.
शाम को हथियार लेकर फिर पहुंचा आरोपी
शिकायत के मुताबिक, उसी दिन शाम करीब 5:45 बजे राजेश खलखो दोबारा हथियार के साथ निर्माण स्थल पर पहुंचा. इस दौरान संतोष जायसवाल ने तत्कालीन एसएसपी को फोन कर घटना की जानकारी दी. आरोप था कि पुलिस की सूचना मिलते ही आरोपी और उसके साथी वहां से भागने लगे. भागते समय राजेश खलखो ने एक राउंड फायरिंग भी की थी.
2014 में दाखिल हुई थी चार्जशीट
पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 25 मार्च 2014 को राजेश खलखो के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. इसके बाद 3 अप्रैल 2014 को अदालत ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय कर सुनवाई शुरू की.
मुकदमे की सुनवाई के दौरान गवाह अदालत में पेश नहीं हुए. अदालत ने गवाहों को बुलाने के लिए समन जारी किया. इसके अलावा एसएसपी को भी पत्र भेजकर गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया. इसके बावजूद कोई भी गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ. आखिरकार 23 जुलाई को अदालत ने अभियोजन साक्ष्य बंद कर दिया.
सबूत नहीं मिलने पर आरोपी बरी
सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ रंगदारी मांगने और फायरिंग के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त कानूनी साक्ष्य मौजूद नहीं हैं. इसी आधार पर न्यायिक दंडाधिकारी एजेलिना जॉन की अदालत ने राजेश खलखो उर्फ राजेश उरांव को बरी करने का आदेश दिया.