Ranchi News: झारखंड में नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) को लागू करने की प्रक्रिया में कई कमियां सामने आई हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की समीक्षा रिपोर्ट में समय पर चार्जशीट दाखिल करने, साइबर पुलिसिंग, फोरेंसिक जांच और तकनीकी व्यवस्था को लेकर राज्य को सुधार के निर्देश दिए गए हैं।
60 दिन में सिर्फ 13.02% मामलों में चार्जशीट, 24 जिलों में सिर्फ 15 में साइबर थाने
रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में केवल 13.02% मामलों में 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की गई। वहीं 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का आंकड़ा 24.82% रहा। केंद्र ने जांच की निगरानी मजबूत करने और समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।
झारखंड के 24 जिलों में अभी केवल 15 जिलों में साइबर पुलिस स्टेशन सक्रिय हैं। केंद्र ने सभी जिलों में साइबर थाने शुरू करने के साथ ई-जीरो FIR व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है। वित्तीय साइबर अपराध के मामलों में पैसे को समय रहते रोकने की दर भी महज 17.23% रही है।
2730 साइबर मामलों में सिर्फ 351 का निपटारा
राज्य में 2730 साइबर मामलों में से सिर्फ 351 मामलों को पूरा किया जा सका है। यानी करीब 12.85% मामलों में ही कार्रवाई पूरी हुई। समीक्षा में रांची, धनबाद, जामताड़ा और देवघर को साइबर अपराध के प्रमुख हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है।
राज्य के सभी जिलों में मोबाइल फोरेंसिक वैन उपलब्ध नहीं हैं। फिलहाल 24 मोबाइल फोरेंसिक वैन खरीदने की प्रक्रिया चल रही है। केंद्र ने खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने और बड़े जिलों में कम से कम दो मोबाइल फोरेंसिक वैन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
ICJS के 46.18 करोड़ रुपये अब तक खर्च नहीं
ICJS 2.0 योजना के तहत झारखंड के लिए 46.18 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, लेकिन समीक्षा बैठक तक इस राशि में से कोई खर्च नहीं हुआ था। इसके अलावा राज्य में 49 NETGRID यूजर में केवल 26 यूजर ही सक्रिय पाए गए। केंद्र ने मुख्य सचिव स्तर पर हर 15 दिन में समीक्षा बैठक करने और लंबित कार्यों को तय समय सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया है।