JSSC CGL 2023: JSSC CGL 2023 परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच अब और तेज हो गई है. सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक ने मामले की पड़ताल के लिए 17 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है. SIT की कमान STF के IG अनूप बिरथरे को दी गई है. टीम में कई वरिष्ठ IPS अधिकारियों के साथ DSP, इंस्पेक्टर और दारोगा स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं.
SIT में कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी
टीम में DIG SCRB वाईएस रमेश, विशेष शाखा के SP हृदीप पी. जनार्दनन, SIB के SP सौरभ, पुलिस मुख्यालय की SP निधि द्विवेदी, CID के SP पूज्य प्रकाश, SP रोशन गुड़िया और ASP चैनपुर श्रुति को शामिल किया गया है. इसके अलावा जांच के लिए पुलिस अधिकारियों और जवानों की अलग टीम भी लगाई गई है.
37 लोगों को नोटिस जारी
SIT ने गुरुवार को मामले से जुड़े 37 संदिग्धों और संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया. इनसे पूछताछ कर परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है. जांच एजेंसी परीक्षा से जुड़े दूसरे पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है. मामले में अब तक दर्जनभर से ज्यादा आरोपित जेल भेजे जा चुके हैं.
सितंबर 2024 में हुई थी परीक्षा
JSSC CGL परीक्षा का आयोजन 21 और 22 सितंबर 2024 को हुआ था. परीक्षा के बाद पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोपों को लेकर राज्यभर में विवाद खड़ा हो गया था. इसके बाद CID थाना में 1 जनवरी 2025 को कांड संख्या 01/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. मामले के शुरुआती अनुसंधानकर्ता SP हृदीप पी. जनार्दनन रहे.
पहले CID ने पेपर लीक से किया था इनकार
मामले की पिछली जांच में CID ने हाईकोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में कहा था कि परीक्षा का प्रश्नपत्र वास्तव में लीक नहीं हुआ था.
जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ बिचौलियों और एजेंटों ने WhatsApp पर कुछ सवालों के जवाब भेजकर अभ्यर्थियों को पेपर लीक होने का भरोसा दिलाया और इसके नाम पर पैसे वसूले. इस मामले में पैसे वसूलने वाले कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी.
अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद सामने आई नई जानकारी
पूरे मामले में नया मोड़ तब आया, जब CID ने JPSC मेधा घोटाला जांच के दौरान परीक्षा कराने वाली एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया.
पूछताछ में अभय तिवारी ने JSSC CGL परीक्षा में बड़े स्तर पर कथित अनियमितता की जानकारी दी. आरोप है कि पैसे लेकर अयोग्य अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराया गया. इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और अब 17 सदस्यीय SIT के जरिए मामले की विस्तृत जांच आगे बढ़ाई जा रही है.