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  • 2026-08-26

Jharkhand Politics: जयराम महतो के "हॉट-टॉक" को लेकर बोले बाबूलाल मरांडी:- मर्यादा की बात सिर्फ नेताओं के लिए ही क्यों?

Jharkhand: जयराम महतो और पुलिस के बीच कथित विवाद को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने जयराम महतो का समर्थन करते हुए पुलिस के कामकाज और व्यवहार पर सवाल उठाए हैं. मरांडी ने चास थाना प्रभारी सुषमा कुमारी से जुड़ा बताया जा रहा एक पुराना वायरल ऑडियो भी साझा किया है. यह मामला उस बहस के बीच सामने आया है, जिसमें पुलिस एसोसिएशन और जनप्रतिनिधियों के बीच भाषा और मर्यादा को लेकर बयानबाजी हो रही है.

जयराम महतो और थाना प्रभारी के विवाद का किया जिक्र
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विधानसभा सदस्य जयराम महतो और थाना प्रभारी रवि कुमार के बीच कथित हॉट-टॉक के बाद पुलिस एसोसिएशन की ओर से अलग-अलग बयान सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान भाषा और शिष्टाचार का ध्यान रखना जरूरी है. मरांडी ने यह भी सवाल किया कि अगर मर्यादा की बात हो रही है, तो यह नियम केवल जनप्रतिनिधियों पर ही क्यों लागू होना चाहिए.

पुलिस के व्यवहार पर उठाया सवाल
मरांडी ने पूछा कि क्या पुलिस एसोसिएशन ने कभी ऐसे पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने आम लोगों से गाली-गलौज या अभद्र भाषा में बात की हो. उन्होंने कहा कि थानों में आम लोगों के साथ कथित दुर्व्यवहार की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं. फोन पर गाली-गलौज और अभद्र भाषा के इस्तेमाल की शिकायतें भी सामने आती रही हैं. मरांडी के अनुसार, अगर जनप्रतिनिधियों और पुलिस के बीच भी इसी तरह की टकराव की स्थिति बन रही है, तो इसके पीछे सरकार की नीति और पुलिस अधिकारियों को मिल रहा कथित संरक्षण भी जिम्मेदार है.

पुराने ऑडियो का भी किया जिक्र
बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि कुछ महीने पहले बोकारो के चास थाना प्रभारी से जुड़ा एक कथित गाली-गलौज वाला ऑडियो वायरल हुआ था. उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने सरकार से इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की थी. मरांडी का आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय सरकार ने ऐसे पुलिस अधिकारियों को संरक्षण दिया. उन्होंने सवाल किया कि अगर आम व्यक्ति का किसी के साथ गाली-गलौज करना गलत और अपराध है, तो पुलिस को आम जनता से अपशब्द कहने का अधिकार आखिर किसने दिया.

दोषी पुलिसकर्मियों पर FIR की मांग
मरांडी ने कहा कि पुलिस को सबसे पहले आम लोगों से बातचीत करने का तरीका और शिष्टाचार सीखना होगा. उन्होंने सरकार से मांग की कि इस तरह के मामलों को सिर्फ निलंबन तक सीमित नहीं रखा जाए. अगर कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ प्राथमिकी भी दर्ज की जानी चाहिए.

पुलिस और जनता के बीच भरोसे पर जोर
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास तभी मजबूत होगा, जब कानून सभी लोगों के लिए एक समान तरीके से लागू किया जाएगा. उन्होंने थानों में आम लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की भी मांग की. उनका कहना है कि पुलिस और जनता के बीच बेहतर संबंध के लिए दोनों पक्षों के साथ समान व्यवहार और कानून का पालन जरूरी है.


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