Nepal Flood Alert: नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत सीमा के पास भारी बाढ़ और मलबे ने तबाही मचा दी है. इस आपदा में अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. 750 से ज्यादा लोग अभी लापता बताए जा रहे हैं. लापता लोगों में 133 भारतीय और 37 अनिवासी भारतीय शामिल हैं. इनमें कई लोग कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए थे. हालात को देखते हुए नेपाल, भारत और चीन की टीमें राहत और बचाव में जुटी हैं.
भूकंप के कुछ मिनट बाद आई बाढ़
नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, तिब्बत क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था. भूकंप के कुछ ही मिनट बाद अचानक बाढ़ आ गई. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि भूकंप के बाद लेंडे नदी के ऊपरी हिस्से में बड़ा भूस्खलन हुआ. हिमखंड भी टूटकर नीचे गिरे. इससे नदी का रास्ता रुक गया. इसके बाद मलबे के साथ पानी का तेज बहाव नीचे की ओर आया. इस तेज बहाव ने आसपास के इलाकों में भारी नुकसान किया.
भारत ने मदद के लिए टीमें तैयार रखीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की. उन्होंने हादसे पर दुख जताया और भारत की तरफ से हर संभव मदद का भरोसा दिया. भारतीय वायुसेना और NDRF की टीमें राहत सामग्री के साथ तैयार रखी गई हैं. भारतीय दूतावास ने मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं. नेपाल में भारतीय दूतावास: +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 , बीजिंग में भारतीय दूतावास: 0086 185 1428 4905, नेपाल पर्यटन बोर्ड: 1234, 1144, पर्यटन पुलिस: 9851289445, उत्तर प्रदेश राज्य हेल्पलाइन: 1070
सड़क और पुल भी बाढ़ में बहे
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के आसपास के इलाकों में हुआ है. नुवाकोट और रसुवा को जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क कई जगह बह गई है. आवागमन के लिए बने 19 पुल भी नष्ट हो गए हैं. बाढ़ से जलविद्युत परियोजनाओं को भी बड़ा नुकसान हुआ है. 354 मेगावाट क्षमता वाली 8 चालू परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं. इनमें रसुवागढ़ी और अपर त्रिशूली 3ए जैसी परियोजनाएं शामिल हैं. इसके अलावा 5 निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है.
12 हेलीकॉप्टरों से रेस्क्यू ऑपरेशन
नेपाली सेना और पुलिस की टीमें राहत और बचाव अभियान चला रही हैं. रेस्क्यू के लिए 12 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं. हालांकि, कई जगह पहुंचना अभी भी मुश्किल बना हुआ है. सड़कें टूटने और खराब मौसम के कारण स्याप्रुबेसी और तिमुरे जैसे इलाकों में राहत पहुंचाने में परेशानी हो रही है. चीन ने भी तिब्बत के गिरोंग क्षेत्र में सैकड़ों बचावकर्मियों को तैनात किया है. वहां खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है. मौसम खराब होने और नदी में बनी अस्थायी झीलों के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे के इलाकों में अलर्ट जारी किया है. फिलहाल नेपाल, भारत और चीन की टीमें राहत और बचाव में जुटी हैं.