Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-08-27

Jharkhand News: JPSC नियुक्ति मामले में CBI की जांच का दायरा बढ़ा, कोचिंग संस्थान भी जांच के घेरे में

Jharkhand News: JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े कथित नियुक्ति घोटाले की जांच अब कोचिंग संस्थानों तक पहुंच गई है. रांची और हजारीबाग में कुछ कोचिंग संचालकों के परिसरों पर हुई छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर CBI उनकी संभावित भूमिका की जांच कर रही है.


जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या किसी कोचिंग संस्थान या उससे जुड़े लोगों ने अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से परीक्षा या साक्षात्कार में सफलता दिलाने में भूमिका निभाई. साथ ही CBI कथित सिंडिकेट और कोचिंग संचालकों के बीच संपर्कों की भी जांच कर रही है.

साक्षात्कार में सफलता के लिए 15 लाख रुपये लेने का आरोप

जांच के दौरान अभय तिवारी से पूछताछ में कथित तौर पर यह जानकारी सामने आई कि JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा के साक्षात्कार में सफलता दिलाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये तक लिए गए थे. हालांकि, इन दावों और आरोपों की जांच एजेंसी द्वारा सत्यापन किया जा रहा है.


CBI इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित नेटवर्क की पहुंच JPSC के तत्कालीन पदाधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों तक थी या नहीं. मामले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते और पूर्व सदस्यों डॉ. अजीता भट्टाचार्य तथा डॉ. जमाल अहमद के नाम जांच के दौरान सामने आए हैं.

कोचिंग संचालकों और अन्य आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल

जांच के दायरे में पतंजलि कोचिंग से जुड़े रवि कुमार, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और कोचिंग संचालक आदित्य पांडेय के नाम भी सामने आए हैं. CBI इनके कथित नेटवर्क से संबंधों और वित्तीय लेनदेन समेत अन्य पहलुओं की जांच कर रही है. जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि JPSC की पूर्व सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य के नाम पर साक्षात्कार में सफलता दिलाने के लिए उनके पीए ब्रजराम के माध्यम से पैसे लिए जाते थे. इस आरोप की भी जांच की जा रही है.

छापेमारी में मिले दस्तावेजों से जोड़ी जा रहीं कड़ियां

मामले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन की भी जांच हो रही है. आरोप है कि मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र के माध्यम से पैसे लिए गए. हालांकि, इन आरोपों की सत्यता की जांच अभी जारी है.

CBI छापेमारी में मिले दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य जानकारियों के आधार पर कथित सिंडिकेट से जुड़े लोगों के बीच संबंधों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में नए तथ्य सामने आने की संभावना है.

WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !