East Singhbhum News: रक्षाबंधन के मौके पर चाकुलिया के सुनसुनिया जंगल में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की अनोखी तस्वीर देखने को मिली. सैकड़ों आदिवासी महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में जंगल पहुंचीं. उन्होंने साल के पेड़ों को राखी बांधी और उनकी रक्षा का संकल्प लिया. यह आयोजन पद्मश्री सम्मानित जमुना टुडू के नेतृत्व में हुआ.
पेड़ों की पूजा कर बांधा रक्षा सूत्र
कार्यक्रम की शुरुआत पेड़ों की पूजा और आरती के साथ हुई. इसके बाद महिलाओं ने पेड़ों को भाई का दर्जा देते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधी. महिलाओं ने जंगल और पेड़ों की सुरक्षा का संकल्प भी लिया. मौके पर चाकुलिया थाना प्रभारी राजेश कुमार भी मौजूद रहे. उन्होंने खुद पेड़ को राखी बांधकर पर्यावरण संरक्षण का
संदेश दिया.
मंदार और धमसा की थाप पर हुआ नृत्य
रक्षाबंधन के दौरान सुनसुनिया जंगल का माहौल पूरी तरह पारंपरिक रंग में नजर आया. मंदार और धमसा की थाप पर महिलाओं ने सामूहिक नृत्य किया. इस दौरान जंगल और वन्यजीवों की रक्षा का संदेश दिया गया. साथ ही अवैध पेड़ कटाई रोकने और पर्यावरण बचाने का संकल्प लिया गया.
वर्षों से पेड़ों को राखी बांधती हैं जमुना टुडू
जमुना टुडू ने कहा कि वह पेड़ों को अपना भाई मानती हैं. इसी सोच के साथ वह लंबे समय से जंगल में रक्षाबंधन मनाती आ रही हैं. उन्होंने कहा कि जंगल कम होने और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां बढ़ने के बीच पेड़ों की सुरक्षा सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने लोगों से ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने और जंगल बचाने में सहयोग करने की अपील की.
राखी के जरिए दिया प्रकृति बचाने का संदेश
सुनसुनिया जंगल का यह आयोजन रक्षाबंधन को एक अलग संदेश से जोड़ गया. यहां राखी सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक नहीं रही. बल्कि पेड़ों और इंसानों के रिश्ते को भी सामने लाई. महिलाओं का यह प्रयास जंगल बचाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देता नजर आया.