Ranchi News: JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता के मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की जमानत याचिका पर CID की विशेष अदालत में सुनवाई पूरी हो गई। बचाव पक्ष और जांच एजेंसी की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
बचाव पक्ष ने साक्ष्य के अभाव का दिया तर्क
एल ख्यांग्ते की ओर से वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार और अधिवक्ता चंदना कुमारी ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। बचाव पक्ष का कहना था कि जांच के दौरान उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। अधिवक्ताओं ने यह भी दलील दी कि उनके ठिकानों पर हुई छापेमारी में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे मामले में उनकी संलिप्तता साबित हो। गिरफ्तारी की वैधता पर भी बचाव पक्ष ने सवाल उठाए।
CID ने TDPL को परीक्षा का जिम्मा देने में भूमिका का लगाया आरोप
दूसरी ओर, CID ने अदालत में एल ख्यांग्ते की भूमिका को लेकर अलग पक्ष रखा। जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा आयोजन के लिए TDPL को जिम्मेदारी दिए जाने की प्रक्रिया में ख्यांग्ते की भूमिका थी। CID का दावा है कि TDPL की ओर से आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर स्थिति की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई नहीं की।
पिछली सुनवाई के दौरान CID ने अदालत में केस डायरी भी प्रस्तुत की थी। जांच एजेंसी की ओर से इसी मामले में जुटाए गए साक्ष्यों और अब तक की जांच की जानकारी अदालत के समक्ष रखी गई।
10 अगस्त को हुई थी एल ख्यांग्ते की गिरफ्तारी
CID ने परीक्षा में कथित अनियमितता की जांच के दौरान एल ख्यांग्ते को 10 अगस्त को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, उनके खिलाफ TDPL से कथित रूप से करीब 2 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप भी है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई थी, जिसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं।
मामले में 20 से अधिक गिरफ्तारियां
परीक्षा में कथित अनियमितता को लेकर CID ने जांच शुरू की है। इस केस में अब तक 20 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की भूमिका भी एजेंसी के जांच दायरे में आई।
CID के अनुसार, मामले के कथित मुख्य आरोपी अभय तिवारी के स्वीकारोक्ति बयान में एल ख्यांग्ते की भूमिका का उल्लेख किया गया है। बयान में TDPL को परीक्षा आयोजन के लिए एजेंसी के तौर पर चुने जाने की प्रक्रिया में ख्यांग्ते की अहम भूमिका होने का दावा किया गया है। इन आरोपों की पुष्टि अदालत में होना अभी बाकी है।