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  • 2026-09-03

Jharkhand Budget Expense: 1.42 लाख करोड़ के बजट में अब तक सिर्फ 33,897 करोड़ खर्च, पेंशन मद में शून्य; जानिए किस विभाग की क्या है स्थिति

Jharkhand Budget Expense: झारखंड सरकार के चालू वित्तीय वर्ष के बजट खर्च की तस्वीर सामने आई है. कुल 1,42,019.37 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान के मुकाबले अब तक वास्तविक खर्च 33,897.27 करोड़ रुपये हुआ है. सरकारी स्तर पर 88,427.86 करोड़ रुपये की राशि की स्वीकृति दी गई थी. इसमें से 62,677.27 करोड़ रुपये DDO को आवंटित किए गए. कोषागार से 57,192.98 करोड़ रुपये की निकासी भी हो चुकी है. हालांकि, वास्तविक रूप से खर्च हुई रकम 33,897.27 करोड़ रुपये ही है.

महिला और बाल विकास विभाग सबसे आगे
विभागवार खर्च देखें तो महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग सबसे आगे है. इस विभाग ने अब तक 8,434.76 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. ऊर्जा विभाग 4,249.79 करोड़ रुपये के खर्च के साथ दूसरे स्थान पर है. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्राथमिक एवं वयस्क शिक्षा प्रभाग ने 3,481.42 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

पेंशन मद में अब तक शून्य खर्च
बजट में 9,967.40 करोड़ रुपये रखने के बावजूद पेंशन मद में अब तक वास्तविक खर्च शून्य दर्ज किया गया है. संसदीय कार्य प्रभाग में 0.62 करोड़ रुपये और आवास प्रभाग में 0.53 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सामान्य प्रभाग का वास्तविक खर्च 3.50 करोड़ रुपये रहा.

कृषि और ग्रामीण विकास की स्थिति
कृषि प्रभाग के लिए 2,106.36 करोड़ रुपये का बजट है. इसमें से वास्तविक खर्च 155.85 करोड़ रुपये हुआ है. पशुपालन प्रभाग में 624.83 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले 63.86 करोड़ रुपये खर्च किए गए. सहकारिता प्रभाग ने 483 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इसका बजट 962.15 करोड़ रुपये है. मत्स्य प्रभाग में 25.44 करोड़ रुपये और डेयरी प्रभाग में 67.15 करोड़ रुपये का वास्तविक खर्च हुआ है. ग्रामीण विकास विभाग का बजट 8,978.87 करोड़ रुपये है. इसमें से 1,057.34 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. ग्रामीण कार्य विभाग ने 1,960.86 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. पंचायती राज विभाग का वास्तविक खर्च 149.28 करोड़ रुपये रहा.

सड़क, पानी और ऊर्जा में कितना खर्च
पथ निर्माण विभाग के लिए 6,301.32 करोड़ रुपये का बजट है. अब तक 989.69 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. जल संसाधन विभाग ने 790.17 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. लघु सिंचाई प्रभाग का खर्च 141.20 करोड़ रुपये रहा. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने 163.90 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. ऊर्जा विभाग का वास्तविक खर्च 4,249.79 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है. इसका बजट 11,199.32 करोड़ रुपये है. भवन निर्माण विभाग ने 201.33 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का वास्तविक खर्च 157.81 करोड़ रुपये रहा.

गृह और कानून से जुड़े विभागों का खर्च
गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के गृह प्रभाग ने 3,241.30 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. विधि विभाग का वास्तविक खर्च 283.73 करोड़ रुपये रहा. झारखंड हाई कोर्ट के लिए 240.77 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले 83.06 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. आपदा प्रबंधन प्रभाग में 18.61 करोड़ रुपये का वास्तविक खर्च दर्ज किया गया है. राजस्व एवं भूमि सुधार प्रभाग ने 293.28 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

वित्तीय मदों में भी कम खर्च
वित्त विभाग के लिए 2,218.50 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. इसमें से वास्तविक खर्च 153.87 करोड़ रुपये हुआ. ब्याज भुगतान मद में 6,671.96 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले 198.50 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. ऋण पुनर्भुगतान के लिए 9,139.25 करोड़ रुपये का प्रावधान है. वास्तविक खर्च 333.48 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. वाणिज्य कर विभाग ने 64.74 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. कोषागार एवं संस्थागत वित्त मद में 6.75 करोड़ रुपये का खर्च हुआ.

शिक्षा और स्वास्थ्य पर कितना खर्च
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग का वास्तविक खर्च 2,243.29 करोड़ रुपये रहा. उच्च शिक्षा प्रभाग ने 790.64 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. तकनीकी शिक्षा प्रभाग का खर्च 89.62 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. स्कूली शिक्षा के माध्यमिक शिक्षा प्रभाग ने 1,336.10 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. प्राथमिक एवं वयस्क शिक्षा प्रभाग ने 3,481.42 करोड़ रुपये खर्च किए.

रोजगार, उद्योग और कल्याण विभाग
श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग ने 772.93 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. उद्योग विभाग का वास्तविक खर्च 61.68 करोड़ रुपये रहा. खान एवं भूतत्व विभाग ने 162.95 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. कल्याण प्रभाग का खर्च 237.95 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. अल्पसंख्यक कल्याण प्रभाग में 17.76 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. योजना एवं विकास विभाग ने 35.16 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

नगर विकास और पर्यटन की स्थिति
नगर विकास प्रभाग ने 205.97 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. आवास प्रभाग का वास्तविक खर्च सिर्फ 0.53 करोड़ रुपये रहा. पर्यटन प्रभाग ने 22.13 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. कला-संस्कृति प्रभाग का खर्च 37.59 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. परिवहन विभाग ने 8.87 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.

प्रशासनिक विभागों में भी अलग-अलग तस्वीर
मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय प्रभाग ने 37.78 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. राज्यपाल सचिवालय का वास्तविक खर्च 5.79 करोड़ रुपये रहा. निर्वाचन विभाग ने 86.36 करोड़ रुपये खर्च किए. निगरानी प्रभाग का खर्च 25.01 करोड़ रुपये रहा. नागर विमानन प्रभाग में 35.22 करोड़ रुपये खर्च हुए. विधानसभा का वास्तविक खर्च 62.21 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. JPSC ने 10.35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार प्रभाग का खर्च 21.16 करोड़ रुपये रहा. राजभाषा प्रभाग ने 7.64 करोड़ रुपये खर्च किए.

बजट से वास्तविक खर्च तक कितना अंतर
आंकड़ों से साफ है कि सरकार के स्तर पर राशि की स्वीकृति और कोषागार से निकासी होने के बावजूद अंतिम स्तर पर खर्च की गति अलग है. कुल बजट प्रावधान 1.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि वास्तविक खर्च अभी 33,897.27 करोड़ रुपये तक पहुंचा है. अब सरकार के सामने बजट में रखी गई राशि को योजनाओं और विकास कार्यों में तेजी से खर्च करने की चुनौती है. अलग-अलग विभागों में खर्च की रफ्तार में बड़ा अंतर भी इन आंकड़ों से सामने आता है.


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