Major Rishabh Singh Sambyal: मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने करीब 12 साल की सैन्य सेवा के बाद भारतीय सेना से समय से पहले रिटायरमेंट ले लिया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी रहे मेजर ऋषभ ने समय से पहले रिटायरमेंट का फैसला लिया है. करीब 12 साल तक सेना में सेवा देने के बाद उन्होंने पारिवारिक कारणों से यह कदम उठाया. सेना की वर्दी उतारना उनके लिए आसान नहीं था. सोशल मीडिया पर उन्होंने अपनी भावनाएं भी साझा की हैं. उन्होंने बताया कि सेना की वर्दी पहनना बचपन से उनका सपना था. ऐसे में खुद वर्दी उतारने का फैसला उनकी जिंदगी का सबसे कठिन फैसला रहा.
NDA से शुरू हुआ सेना का सफर
मेजर ऋषभ ने साल 2013 में NDA की परीक्षा पास की थी. इसके बाद साल 2014 में उन्होंने NDA के 133वें कोर्स में प्रवेश लिया. आगे उन्होंने IMA से मिलिट्री स्टडीज की पढ़ाई पूरी की. सेना में रहते हुए उन्हें 4 पैरा स्पेशल फोर्सेस का हिस्सा बनने का मौका मिला. यह सेना की बेहद खास और कठिन ट्रेनिंग वाली यूनिट मानी जाती है. यहां सेवा के दौरान उन्हें बलिदान बैज भी मिला.
गणतंत्र दिवस परेड में भी निभाई अहम भूमिका
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल के सैन्य करियर में कई खास जिम्मेदारियां रहीं. साल 2021 की गणतंत्र दिवस परेड में उन्होंने जाट रेजिमेंट के मार्चिंग दस्ते का नेतृत्व किया था. उस साल इस दस्ते को सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दस्ते का खिताब मिला था. इसके बाद उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का एडीसी बनाया गया. इस जिम्मेदारी में उन्होंने राष्ट्रपति से जुड़े वीवीआईपी प्रोटोकॉल और सुरक्षा से जुड़े जरूरी काम संभाले.
सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय रहे
मेजर ऋषभ सिर्फ सेना की जिम्मेदारियों के कारण ही चर्चा में नहीं रहे. सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी पहचान बनी. उनका अनुशासन, सादगी और व्यवहार लोगों को काफी पसंद आया. सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं. ऐसे में सेना छोड़ने के उनके फैसले से उनके फैंस काफी निराश हैं.
अब युवाओं के साथ काम करने की तैयारी
सेना से अलग होने के बाद भी मेजर ऋषभ का देश सेवा से जुड़ा नजरिया बना हुआ है. उन्होंने संकेत दिया है कि आगे वह युवाओं को सही दिशा देने और उन्हें प्रेरित करने पर ध्यान देंगे. इसके साथ ही वह राष्ट्र निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी काम करने की तैयारी में हैं. फिलहाल करीब 12 साल की सैन्य सेवा के बाद मेजर ऋषभ ने नई राह चुनने का फैसला किया है. पारिवारिक कारणों से लिया गया यह फैसला उनके लिए भावुक पल रहा, लेकिन आगे भी देश और युवाओं के लिए काम करने का उनका संकल्प कायम है.