Jharkhand: देवघर एम्स को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई. भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की जनहित याचिका पर हुई सुनवाई में एम्स की सुविधाओं से जुड़े कई सवाल अदालत के सामने आए. मामले में दाखिल सिनॉप्सिस के जरिए एम्स की मौजूदा स्थिति पर कई बिंदु उठाए गए. इनमें बिजली की व्यवस्था, पानी की उपलब्धता, आने-जाने की सुविधा, फायर सेफ्टी और जमीन का मुद्दा शामिल है.
बिजली की व्यवस्था पर सवाल
सांसद की ओर से अदालत को बताया गया कि एम्स के लिए 132/33 केवी पावर सब-स्टेशन का प्रस्ताव है. लेकिन अभी तक यह चालू नहीं हो पाया है. इसके साथ ही एम्स परिसर में केंद्रीय विद्यालय की जरूरत भी बताई गई. पुनासी डैम से सीधे पानी पहुंचाने की मांग रखी गई है. एम्स तक लोगों की आवाजाही आसान हो, इसके लिए रेलवे ओवरब्रिज यानी ROB की जरूरत भी अदालत के सामने रखी गई.
24 मंजिला भवन और फायर सेफ्टी
एम्स की इमारत 24 मंजिल की है. इसी वजह से अग्नि सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाया गया. सिनॉप्सिस में दावा किया गया कि मौजूदा फायर सेफ्टी व्यवस्था 5 से 6 मंजिल तक की इमारतों के लिए ही सीमित है. ऐसे में 24 मंजिला एम्स भवन के लिए पर्याप्त और उसके अनुरूप अग्निशमन व्यवस्था की जरूरत बताई गई. याचिका में एम्स के लिए जमीन का मुद्दा भी उठाया गया. बताया गया कि संस्थान के लिए 237 एकड़ जमीन प्रस्तावित है. लेकिन अभी 217 एकड़ जमीन ही उपलब्ध होने की बात कही गई है. इसके अलावा एम्स से जुड़ी अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी स्पष्ट करने की मांग की गई.
सरकार ने कहा, सभी जरूरी काम पूरे
इन आरोपों पर राज्य सरकार ने अदालत में अपना अलग पक्ष रखा. सरकार ने कहा कि एम्स की सभी जरूरी आवश्यकताओं का अनुपालन किया जा चुका है. सरकार की ओर से इस संबंध में एफिडेविट भी दाखिल किया गया है. राज्य सरकार ने कहा कि एम्स को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है.
सरकार को बिंदुवार जवाब देने का निर्देश
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सभी उठाए गए मुद्दों पर विस्तार से जवाब दाखिल करने को कहा. अदालत ने हर बिंदु पर बिंदुवार जवाब देने का निर्देश दिया है. निशिकांत दुबे की ओर से अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने पक्ष रखा. राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता विभोर मयंक ने अदालत में दलील पेश की. अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी.