Jharkhand News: झारखंड के पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से जुड़ा मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। मौजूदा DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति और राज्य सरकार की ओर से बनाए गए DGP चयन एवं नियुक्ति नियमों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले में न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) और वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी है। अब मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को होगी।
रिटायरमेंट से एक दिन पहले नियुक्ति और दो साल के कार्यकाल पर सवाल
एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में इस पहलू पर सवाल उठाया गया है कि यदि किसी अधिकारी को रिटायरमेंट से महज एक दिन पहले DGP नियुक्त किया जाता है और उसे दो साल का कार्यकाल दिया जाता है, तो क्या यह सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों और UPSC के नियमों के अनुरूप है।
रिपोर्ट में DGP पद के लिए अधिकारियों की पात्रता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी कानूनी स्थिति पर विचार किया गया है।
8 जनवरी 2025 को राज्य सरकार ने बनाए थे नए नियम
झारखंड सरकार ने 8 जनवरी 2025 को DGP के चयन और नियुक्ति से संबंधित नए नियम जारी किए थे। इन नियमों को झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका के जरिए चुनौती दी गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि नए नियम सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में जारी निर्देशों को प्रभावित करते हैं।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2025 को मामले में आदेश पारित किया था। बाद में राज्य सरकार ने नियम 5(सी) में संशोधन किया। इसके बाद 30 दिसंबर 2025 को नई DGP नियुक्ति की गई।
UPSC को नाम भेजे बिना नियुक्ति पर भी उठे सवाल
एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने संशोधित नियमों के आधार पर DGP की नियुक्ति की और अधिकारियों के नाम UPSC को भेजने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि DGP की नियुक्ति में UPSC से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
कम से कम छह महीने की सेवा बाकी रखने का सुझाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि DGP पद के लिए ऐसे अधिकारियों के नामों पर विचार किया जाना चाहिए, जिनकी सेवानिवृत्ति में कम से कम छह महीने का समय बाकी हो। इससे नियुक्ति के बाद निर्धारित कार्यकाल और प्रशासनिक निरंतरता को लेकर स्थिति स्पष्ट रह सकती है।
मामले की पिछली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को हुई थी। उस समय एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण सुनवाई को 7 सितंबर तक के लिए टाल दिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं और DGP नियुक्ति की प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर आगे सुनवाई करेगा।