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  • 2026-09-04

Seraikela News: सुवर्णरेखा की रेत से सोना चुनकर गुजर-बसर कर रहे आदिवासी परिवार, रोजाना 300-500 रुपये तक की कमाई

Seraikela News: ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में कई आदिवासी परिवार आज भी सुवर्णरेखा नदी की रेत से सोने के महीन कण निकालकर अपनी आजीविका चला रहे हैं। पीढ़ियों से चला आ रहा यह पारंपरिक काम रोजगार के सीमित विकल्पों के बीच इन परिवारों के लिए आय का महत्वपूर्ण जरिया बना हुआ है।


कुदाल और लकड़ी की थाली से शुरू होती है रोज की मेहनत

सुबह होते ही पुरुष और महिलाएं कुदाल, खुरपी और लकड़ी की थाली लेकर नदी किनारे पहुंचते हैं। वहां से मिट्टी, रेत और छोटे पत्थरों को निकालकर थाली में जमा किया जाता है। इसके बाद नदी के पानी में इसे बार-बार धोया जाता है। इसी प्रक्रिया के जरिए रेत में मौजूद सोने के बेहद छोटे कणों को अलग करने की कोशिश की जाती है।


घंटों की मेहनत के बाद मिले सोने के कणों को स्थानीय बाजार में, खासकर चांडिल के सोनारों के पास बेच दिया जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इससे कई परिवारों को रोजाना करीब 300 से 500 रुपये तक की आमदनी हो जाती है।

दशकों से इसी परंपरागत काम पर निर्भर हैं परिवार

स्थानीय आदिवासी परिवारों का कहना है कि उनके पूर्वज भी लंबे समय से नदी की रेत से सोना निकालने का काम करते रहे हैं। रोजगार के दूसरे साधन सीमित होने के कारण नई पीढ़ी के कई परिवार भी इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।


हालांकि, हर दिन कमाई एक जैसी नहीं होती। कई बार दिनभर नदी में काम करने के बाद भी महज 200 से 350 रुपये तक की आय हो पाती है। इसके बावजूद परिवार के रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए यही कमाई महत्वपूर्ण है।


हर मौसम में नदी किनारे जारी रहता है काम

गर्मी हो या बरसात, ठंड हो या तेज धूप, इन परिवारों की दिनचर्या नदी से जुड़ी रहती है। कई लोग सुबह घर से भोजन लेकर निकलते हैं और शाम तक रेत छानने का काम करते हैं। दिनभर की मेहनत के बाद जितना सोना मिलता है, उसे बेचकर वे अपने घर लौटते हैं।

स्थानीय स्तर पर सुवर्णरेखा नदी की रेत में सोने के कण मिलने की परंपरागत मान्यता के कारण इसे लंबे समय से सोने से जोड़कर देखा जाता रहा है।

वैकल्पिक रोजगार की जरूरत

ईचागढ़ क्षेत्र के इन परिवारों की जिंदगी ग्रामीण इलाकों में रोजगार के सीमित अवसरों की तस्वीर भी सामने रखती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यदि इन परिवारों को सरकारी रोजगार, स्वरोजगार और आजीविका योजनाओं से प्रभावी तरीके से जोड़ा जाए, तो उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है।

अब देखना होगा कि इन पारंपरिक रूप से नदी पर निर्भर परिवारों के लिए वैकल्पिक रोजगार और स्थायी आय के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासन और सरकार क्या कदम उठाती है।

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