Jharkhand News: झारखंड में माध्यमिक सहायक आचार्य की नियुक्ति प्रक्रिया के बीच 218 अभ्यर्थियों की डिग्री जांच के घेरे में आ गई है. शिक्षा विभाग ने इन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का दोबारा सत्यापन कराने का फैसला किया है. ये सभी ऐसे अभ्यर्थी बताए जा रहे हैं, जिन्होंने निजी विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल की है.
JSSC ने माध्यमिक सहायक आचार्य नियुक्ति के लिए 877 अभ्यर्थियों के नाम की अनुशंसा की है. इनमें से 218 अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर विभाग को शिकायत मिली थी. शिकायत मिलने के बाद शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह ने प्रमाणपत्रों की जांच के निर्देश दिए हैं.
मान्यता से लेकर डिग्री की वैधता तक होगी जांच
विभाग की जांच सिर्फ डिग्री देखने तक सीमित नहीं रहेगी. यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित निजी विश्वविद्यालय को जरूरी मान्यता हासिल थी या नहीं. इसके साथ यह भी जांच होगी कि अभ्यर्थियों ने जिन पाठ्यक्रमों से डिग्री हासिल की है, वे निर्धारित नियमों और शैक्षणिक मानकों के अनुरूप हैं या नहीं.
जांच के दायरे में आने वाले 218 अभ्यर्थियों ने पांच निजी विश्वविद्यालयों से पढ़ाई की है. इनमें झारखंड के राधागोविंद विश्वविद्यालय और YBN विश्वविद्यालय के अलावा दूसरे राज्यों के निजी विश्वविद्यालय भी शामिल बताए जा रहे हैं. कुछ अभ्यर्थियों ने सिक्किम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों से B.Ed, M.Ed और संबंधित डिग्रियां हासिल की हैं.
महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति के बाद बढ़ी जांच
निजी विश्वविद्यालयों की डिग्री को लेकर विभाग पहले भी जांच कर चुका है. 33 महिला पर्यवेक्षिकाओं की नियुक्ति के दौरान प्रमाणपत्रों को लेकर अनियमितता का मामला सामने आया था. उस मामले में विभागीय जांच कराई गई थी. जांच के दौरान निजी विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या अधिक पाई गई थी. इसके बाद माध्यमिक सहायक आचार्य नियुक्ति में भी निजी विश्वविद्यालयों से मिली डिग्रियों की जांच का फैसला लिया गया.
राज्य में माध्यमिक सहायक आचार्य के करीब 1,373 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है. JSSC की ओर से इनमें 877 अभ्यर्थियों के नाम की अनुशंसा की जा चुकी है. अब 218 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच के बाद ही उनकी नियुक्ति को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा.
डिग्री में गड़बड़ी मिली तो प्रभावित होगी उम्मीदवारी
विभाग का कहना है कि प्रमाणपत्रों की जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी. अगर किसी अभ्यर्थी की डिग्री या प्रमाणपत्र नियमों के अनुरूप नहीं पाया जाता है, तो उसकी उम्मीदवारी प्रभावित हो सकती है. वहीं, दस्तावेज सही पाए जाने पर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.
फिलहाल शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही यह साफ होगा कि 218 अभ्यर्थियों में कितने लोगों के प्रमाणपत्र नियमों के मुताबिक सही पाए जाते हैं.