Adityapur News: हरिओम नगर स्थित बैंक कॉलोनी में नाली निर्माण के दौरान नगर निगम की क्रेन की चपेट में आने से गेल की घरेलू गैस पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। पाइपलाइन टूटते ही गैस का रिसाव शुरू हो गया, जिससे आसपास के इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब दो घंटे से अधिक समय तक गैस का रिसाव होता रहा।
गैस रिसाव की सूचना पर मौके पर पहुंची गेल और फायर ब्रिगेड की टीम
घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुट गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने फोन के जरिए मेयर को भी घटना की सूचना दी थी, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
गैस रिसाव की जानकारी मिलने पर गेल की टीम और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। इसके बाद गैस सप्लाई बंद करने और रिसाव को नियंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक काफी देर तक गैस की गंध आसपास के क्षेत्र में महसूस होती रही।
गैस लीकेज के बीच सिगरेट पीते दिखे लोग
घटना के दौरान मौके से एक चिंताजनक तस्वीर भी सामने आई। गैस रिसाव वाली जगह के आसपास ही कुछ लोग सिगरेट पीते हुए नजर आए। एक तरफ जहां स्थानीय लोग गैस की सप्लाई तत्काल बंद करने की मांग कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग संभावित खतरे के बावजूद धूम्रपान करते दिखे।
गैस रिसाव वाली जगह पर किसी भी तरह की चिंगारी या आग की स्थिति गंभीर हादसे का कारण बन सकती थी। ऐसे में मौके पर मौजूद लोगों की यह लापरवाही भी चिंता का विषय बनी रही।
निर्माण से पहले भूमिगत पाइपलाइनों की जानकारी क्यों नहीं जुटाई गई?
घटना के बाद नगर निगम के निर्माण कार्य की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिहायशी इलाके में नाली या सड़क निर्माण शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जमीन के नीचे गैस पाइपलाइन, बिजली के तार और अन्य यूटिलिटी लाइनें किन स्थानों से गुजर रही हैं।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि निर्माण शुरू करने से पहले भूमिगत पाइपलाइन की जानकारी और उसका मैप उपलब्ध था, तो क्रेन की खुदाई के दौरान गेल की गैस पाइपलाइन तक कैसे पहुंच गई।
रिसाव पर काबू पाने के बाद दोबारा शुरू हुआ निर्माण
स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब दो घंटे से ज्यादा समय तक गैस रिसाव की स्थिति बनी रही। बाद में गैस पाइपलाइन की सप्लाई बंद कर रिसाव पर नियंत्रण पाया गया। इसके बाद नाली निर्माण का काम फिर से शुरू कर दिया गया।
घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि संवेदनशील रिहायशी इलाकों में निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को कितना गंभीरता से लिया जा रहा है। स्थानीय लोगों का सुझाव है कि ऐसे स्थानों पर काम के दौरान पुलिस की छोटी टीम भी मौजूद रहे, ताकि आपात स्थिति में भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और किसी घटना को बड़े हादसे में बदलने से रोका जा सके।