Railway News Jharkhand-Odisha: दक्षिण पूर्व रेलवे की तीन अहम रेल परियोजनाओं को लेकर काम फिर गति पकड़ रहा है. बुड़ामारा-चाकुलिया, बांगरीपोसी-गोरुमहिसानी और बादामपहाड़-केंदुझर रेल लाइनों में सबसे बड़ी चुनौती वन भूमि से जुड़ी मंजूरी है.
रेलवे के मुताबिक, कहीं नया सर्वे कराया जा रहा है तो कहीं पुराने आंकड़ों का दोबारा सत्यापन हो रहा है. इसी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा.
बुड़ामारा-चाकुलिया: अक्टूबर तक पूरी हो सकती है प्रक्रिया
बुड़ामारा-चाकुलिया परियोजना के लिए वन भूमि से जुड़ा प्रस्ताव जुलाई 2025 में परिवेश पोर्टल पर भेजा गया था. इसके बाद वन विभाग की आपत्तियां सामने आईं. इन्हें दूर करने के लिए ORSAC से नया DGPS सर्वे कराया गया और रिपोर्ट अधिकारियों को सौंप दी गई. मयूरभंज और क्योंझर में क्षतिपूरक वनीकरण के लिए चिन्हित जमीन का संयुक्त निरीक्षण भी पूरा हो चुका है. रेलवे को उम्मीद है कि अक्टूबर 2026 तक सत्यापन और वनीकरण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.
बांगरीपोसी-गोरुमहिसानी रेल परियोजना के लिए जनवरी 2026 में सर्वे की अनुमति मिली थी. लेकिन घाटकुवारी गांव में DGPS सर्वे के दौरान ग्रामीणों के विरोध से काम प्रभावित हुआ. प्रशासन और तहसील स्तर पर कई दौर की बातचीत के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है. हालांकि रेलवे का कहना है कि अलाइनमेंट सर्वे जारी है और इसे रोका नहीं गया है.
बादामपहाड़-केंदुझर: पुराने डेटा की फिर जांच
बादामपहाड़-केंदुझर रेलखंड में वन विभाग की आपत्तियों को दूर करने के लिए नए सिरे से DGPS सर्वे कराया गया है. PSC-1 जांच में तकनीकी कमियां और आंकड़ों में अंतर मिलने के बाद अब स्वीकृत एजेंसियों से दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है. क्षतिपूरक वनीकरण के लिए जमीन भी राज्य सरकार के सहयोग से चिन्हित कर ली गई है.
रेलवे के अनुसार, सर्वे और डेटा सत्यापन के कारण परियोजना में कुछ देरी हुई है. औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वन मंजूरी लेकर निर्माण की रफ्तार बढ़ाने की तैयारी है. तीनों परियोजनाओं में फिलहाल रेलवे का मुख्य फोकस वन विभाग से जुड़ी प्रक्रिया को पूरा करने पर है. मंजूरी मिलने के बाद इन रेल लाइनों के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जा सकेगा.