National News: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को लेकर कर्मचारी संगठनों ने चिंता जताई है। ISRO से जुड़े नौ कर्मचारी संगठनों ने चेयरपर्सन वी. नारायणन को पत्र भेजकर संगठन के भविष्य और निजीकरण को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। सूत्रों के मुताबिक यह पत्र 4 सितंबर 2026 को भेजा गया। पत्र सामने आने के बाद अंतरिक्ष विभाग के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
इन 9 कर्मचारी संगठनों ने भेजा पत्र
चेयरपर्सन को पत्र भेजने वाले संगठनों में ISRO स्टाफ एसोसिएशन, SHAR एम्प्लॉईज एसोसिएशन, ISAC एम्प्लॉईज एसोसिएशन, ISRO स्टाफ एसोसिएशन-LPSC, ISRO स्टाफ एसोसिएशन-BBU, NRSA एम्प्लॉईज यूनियन, स्पेस एम्प्लॉईज एसोसिएशन-BBU, ISRO स्टाफ एसोसिएशन-IPRC और SAC एम्प्लॉईज वेलफेयर एसोसिएशन शामिल हैं।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके साथ ISRO की मौजूदा संस्थागत क्षमता और भूमिका भी मजबूत बनी रहनी चाहिए। संगठनों ने आशंका जताई है कि ISRO को केवल सीमित रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) संस्था तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
सरकारी निवेश से तैयार तकनीक और सुविधाओं पर चिंता
कर्मचारी संगठनों ने ISRO की तकनीक, टेस्ट फैसिलिटी और लॉन्च से जुड़ी आधारभूत संरचना को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इन क्षमताओं और सुविधाओं के निर्माण में सार्वजनिक धन का इस्तेमाल हुआ है। ऐसे में इन्हें निजी कंपनियों के उपयोग या हस्तांतरण की प्रक्रिया स्पष्ट, पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए।
संगठनों ने चेयरपर्सन से निजीकरण को लेकर सरकार और संगठन की नीति पर स्पष्टता देने की मांग की है। उनका जोर इस बात पर है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के दौरान ISRO की संस्थागत भूमिका कमजोर नहीं होनी चाहिए।
कांग्रेस ने मोदी सरकार पर साधा निशाना
कर्मचारी संगठनों के पत्र को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब अंतरिक्ष एजेंसी के भीतर से भी आवाजें उठने लगी हैं। उन्होंने साराभाई और धवन की विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि अगर इस विरासत को व्यवस्थित तरीके से खत्म किया जा रहा है तो लोगों को चुप नहीं रहना चाहिए।
कांग्रेस का आरोप है कि स्टार्टअप और निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के नाम पर सरकार ISRO की भूमिका सीमित कर रही है। पार्टी ने दावा किया कि ISRO द्वारा विकसित तकनीक और संस्थागत क्षमता निजी कंपनियों को उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि इन कंपनियों की दीर्घकालिक स्थिति को लेकर स्पष्टता नहीं है।
IN-SPACe चेयरपर्सन के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
निजी क्षेत्र की भूमिका को लेकर यह विवाद 21 अगस्त को IN-SPACe चेयरपर्सन पवन गोयनका के एक कार्यक्रम में दिए गए बयान के बाद और चर्चा में आया। उन्होंने कहा था कि ISRO भविष्य में लॉन्च व्हीकल नहीं बनाएगा और न ही किसी लॉन्च व्हीकल का निर्माण करेगा। उनके मुताबिक यह काम निजी क्षेत्र या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSU) की ओर से किया जाएगा।
IN-SPACe यानी Indian National Space Promotion and Authorization Centre निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, उन्हें मंजूरी देने और उनकी निगरानी करने वाली संस्था है।
1969 में हुई थी ISRO की स्थापना
ISRO की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के विकास में डॉ. विक्रम साराभाई की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक माना जाता है। अब कर्मचारी संगठनों की ओर से निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को लेकर उठाए गए सवालों ने ISRO की भविष्य की संस्थागत भूमिका को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।