Seraikela News: सरायकेला कॉपरेटिव बैंक घोटाले की जांच को लेकर सरकारी स्तर पर हुई कार्रवाई से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है. मामले में निगरानी यानी ACB ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत जांच करने से इनकार कर दिया था, जबकि बाद में CID ने इसी कानून के तहत जांच की अनुमति सरकार से मांगी थी.
करीब 50 करोड़ के कर्ज से जुड़ा मामला
जानकारी के मुताबिक, सरायकेला कॉपरेटिव बैंक से संजय कुमार डालमिया और उनसे जुड़ी कंपनियों को करीब 50 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया था. आरोप है कि कर्ज लेने के लिए जमीन और बीमा से जुड़े दस्तावेज पेश किए गए थे. जमीन की कीमत ज्यादा दिखाए जाने और बीमा का प्रीमियम बाद में जमा नहीं किए जाने से बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ.
2019 में ACB जांच की हुई थी सिफारिश
मामले से जुड़ी फाइल विभाग की ओर से निगरानी मंत्रिमंडल विभाग को भेजी गई थी. विभागीय सहमति के बाद वर्ष 2019 में दोनों प्राथमिकी की जांच ACB से कराने की सिफारिश की गई. इसके बाद ACB ने PE (12/20) दर्ज कर मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की थी.
करीब दो साल बाद ACB ने जताई असहमति
प्रारंभिक जांच के करीब दो साल बाद ACB ने विभाग को पत्र भेजकर कहा कि इस मामले में निगरानी जांच करना उचित नहीं लगता. इसके बाद सरकार की ओर से भी ACB को पत्र भेजा गया. इसमें कहा गया कि सरायकेला थाने में दर्ज दोनों मामलों में ACB जांच की आवश्यकता नहीं है.
CID ने मांगी PC Act के तहत जांच की अनुमति
इसी बीच CID ने कृषि विभाग को पत्र लिखकर PC Act के तहत जांच की अनुमति मांगी थी. CID ने सरायकेला थाना कांड संख्या 118/19 में कई सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की जांच के लिए सरकार से अनुमति मांगी थी. संशोधित PC Act के तहत सरकारी कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू करने के लिए सरकार की अनुमति जरूरी है. CID ने इसी प्रावधान के आधार पर अनुमति मांगी थी.
सरकार ने CID से मांगी प्राथमिकी की कॉपी
CID की ओर से अनुमति मांगे जाने के बाद सरकार ने प्राथमिकी की कॉपी उपलब्ध कराने को कहा था. CID का कहना था कि संबंधित प्राथमिकी पहले ही सरकार की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज की जा चुकी थी. इस तरह मामले की जांच को लेकर ACB और CID के स्तर पर अलग-अलग प्रक्रिया सामने आई. सरायकेला कॉपरेटिव बैंक से जुड़े इस पूरे मामले में अब मनी लाउंड्रिंग एंगल की भी जांच चल रही है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रहा है.