Jharkhand News: थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया से जूझ रहे मरीजों के लिए झारखंड सरकार ने इलाज की सुविधा बढ़ाई है. अब आयुष्मान भारत और अबुआ स्वास्थ्य कार्ड वाले मरीज सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी मुफ्त ब्लड ट्रांसफ्यूजन करा सकेंगे. अब तक इन मरीजों को खून चढ़ाने के लिए सरकारी अस्पतालों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता था. नई व्यवस्था से मरीजों को अपने जिले या घर के आसपास इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद है.
निजी अस्पतालों के लिए तय किए गए पैकेज
स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों में इलाज के लिए अलग-अलग पैकेज तैयार किए हैं. हर पैकेज की दर भी तय कर दी गई है. इलाज का भुगतान संबंधित स्वास्थ्य योजना के तहत किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इससे नियमित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराने वाले मरीजों को राहत मिलेगी.
सिकल सेल मरीजों के लिए अलग-अलग दर
सिकल सेल मरीजों के लिए सामान्य वार्ड में ब्लड ट्रांसफ्यूजन पैकेज की दर 2,100 रुपये तय की गई है. HDU के लिए 3,300 रुपये का पैकेज रखा गया है. वहीं, बिना वेंटिलेटर ICU के लिए 8,500 रुपये और वेंटिलेटर वाले ICU के लिए 9,000 रुपये तय किए गए हैं.
थैलेसीमिया मरीजों को जांच की सुविधा भी
थैलेसीमिया मरीजों के लिए डे-केयर और एक दिन तक के इलाज वाले पैकेज में सिर्फ ब्लड ट्रांसफ्यूजन नहीं होगा. इसमें CBC, LFT, KFT, यूरिन प्रोटीन और सीरम फेरिटिन जैसी जरूरी जांच भी शामिल की गई हैं. कुछ पैकेज में 15 दिनों की आयरन कम करने वाली दवा भी दी जाएगी. इन पैकेज की दर 2,300 से 3,200 रुपये तक तय की गई है.
बच्चों और गंभीर मरीजों के लिए भी पैकेज
बच्चों में थैलेसीमिया के इलाज के लिए 2,300 से 3,000 रुपये तक के पैकेज तय किए गए हैं. गंभीर एनीमिया के मरीजों के लिए सामान्य वार्ड से लेकर ICU तक अलग-अलग पैकेज रखे गए हैं. वहीं, एप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए 5 लाख रुपये तक का पैकेज निर्धारित किया गया है.
स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि थैलेसीमिया और सिकल सेल के मरीजों को लंबे समय तक नियमित इलाज की जरूरत होती है. सरकार की कोशिश है कि ऐसे मरीजों को जांच, रक्त और इलाज की सुविधा उनके जिले के आसपास ही मिल सके.
आने-जाने का खर्च भी बचेगा
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि निजी अस्पतालों को निर्धारित पैकेज के अनुसार भुगतान किया जाएगा. इससे मरीजों को इलाज के लिए दूर के बड़े अस्पतालों तक जाने की जरूरत कम होगी. साथ ही आने-जाने में होने वाला खर्च भी बचेगा. झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि नई व्यवस्था से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को राहत मिलेगी. खासकर उन मरीजों और उनके परिवारों की परेशानी कम होगी, जिन्हें बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराना पड़ता है.