कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य माहवारी से जुड़े मिथकों को तोड़ना और किशोरियों को सही जानकारी एवं आत्मविश्वास प्रदान करना था, ताकि वे अपने जीवन में स्वस्थ आदतें अपना सकें, इस बार का आयोजन मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज (एमटीएमसी), जमशेदपुर के सहयोग से किया गया, जिसमें 11 वर्ष और उससे अधिक आयु की करीब 120 छात्राओं ने हिस्सा लिया।
अहम भूमिका
इंटरैक्टिव सत्रों का संचालन एमटीएमसी की छात्रा रुहानी और अंजन सहित चार स्वयंसेवी मेडिकल छात्रों ने किया, एक्सएलआरआइ की ओर से नेहाल, सम्यक, अंशी और अनुश्ठा ने आयोजन की रूपरेखा और संवाद को प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाई, इस दौरान रुहानी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि पाखी के जरिए हम माहवारी स्वास्थ्य पर खुली बातचीत को सामान्य बनाना चाहते हैं और किशोरियों को आत्मविश्वास के साथ अपना ख्याल रखने के लिए जागरूक करना चाहते हैं।
महत्वपूर्ण विषय
सत्र के दौरान छात्राओं को स्वच्छता संबंधी आदतों, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया. साथ ही, ऐसा सुरक्षित माहौल भी तैयार किया गया जहां बच्चियां बिना झिझक अपने सवाल पूछ सकें और अनुभव साझा कर सकें. टीम समर्थ्य ने कहा कि हमारा प्रयास है कि पाखी के माध्यम से जागरूक किशोरियां आगे चलकर अपने साथियों, परिवार और समुदाय को भी प्रभावित कर सकें।
जागरूकता और सशक्तिकरण की अपील
माहवारी स्वास्थ्य किसी का नहीं, बल्कि गरिमा, जागरूकता और सशक्तिकरण का विषय है, ज्ञात हो कि पाखी एक्सएलआरआइ की एक नियमित सामाजिक पहल है, जिसके अंतर्गत जमशेदपुर के विभिन्न स्कूलों में लगातार कार्यक्रम किए जाते हैं, वर्षों से यह पहल न सिर्फ जागरूकता बढ़ा रही है, बल्कि किशोरियों में आत्मविश्वास भी विकसित कर रही है।