तीरंदाजी प्रेमियों के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि भारत में पहली बार आर्चरी प्रीमियर लीग का आयोजन होने जा रहा है. इस ऐतिहासिक लीग का उद्देश्य भारतीय तीरंदाजों को अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराना और इस खेल को वैश्विक पहचान दिलाना है.
नई दिल्ली में आयोजित चयन समिति की बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट डी.बी. सुन्दररमम मौजूद रहे. बैठक में लीग की संरचना और टीमों के चयन को अंतिम रूप दिया गया.
इस लीग में कुल छह टीमें हिस्सा लेंगी -
1. महाराष्ट्र के माईटी मराठाज
2. तेलंगाना के काकतिया नाइट्स
3. राजस्थान के राजपुताना रॉयल्स
4. तमिलनाडु के चोला चीफ्स
5. झारखंड के चेरो आर्चर्स
6. दिल्ली के पृथ्वीराज योद्धा
खास बात यह है कि इन टीमों में भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी हिस्सा लेंगे, जिससे प्रतियोगिता और भी रोमांचक बन जाएगी.
आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया का मानना है कि यह लीग तीरंदाजी खेल को नई दिशा देगी, युवाओं को प्रेरित करेगी और भारत को विश्व मंच पर एक मजबूत पहचान दिलाएगी.
झारखंड को माना जाता है तीरंदाजी की धरती, कई खिलाड़ियों ने बढ़ाया देश का मान
झारखंड तीरंदाजी की धरती माना जाता है और यहां से कई मशहूर तीरंदाज निकले हैं जिन्होंने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है. इनमें सबसे बड़ा नाम है दीपिका कुमारी का, जो कभी विश्व नंबर-1 रह चुकी हैं. उन्होंने चार बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया. उनके योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से भी नवाजा गया. इसी तरह कोमलिका बारी, जमशेदपुर की उभरती हुई तीरंदाज हैं, जिन्होंने वर्ल्ड आर्चरी यूथ एंड कैडेट चैंपियनशिप में कैडेट वर्ल्ड चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है. झारखंड की ही लक्ष्मीरानी माझी ने 2015 की विश्व आर्चरी चैंपियनशिप में टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीतकर राज्य और देश का नाम रोशन किया.

इसी कड़ी में गोरा हो का नाम भी लिया जाता है, जो सरायकेला-खरसावां के ग्रामीण इलाके से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे. उन्होंने 2018 में एशिया कप आर्चरी चैम्पियनशिप में टीम के साथ स्वर्ण पदक जीता. वहीं मधुमिता कुमारी ने एशियाई खेलों में आर्चरी टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीतकर झारखंड की उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ा. खेल के क्षेत्र में योगदान देने वाले संजीवा कुमार सिंह भी झारखंड के गौरव हैं, जिन्हें अर्जुन पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कार दोनों से सम्मानित किया गया है.
इन सभी तीरंदाजों ने न केवल झारखंड को तीरंदाजी का गढ़ साबित किया है बल्कि भारत को भी वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाया है.