बैठक में पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह, उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, एसी मो. मुमताज अंसारी, एसडीओ चास प्रांजल ढ़ांडा और एसडीओ बेरमो मुकेश मछुआ सहित कई आला अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन ने पूजा पंडाल प्रबंधन से लेकर विसर्जन की व्यवस्था तक, हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की और संबंधित अधिकारियों तथा पूजा समितियों को स्पष्ट निर्देश दिए।
पूजा पंडाल एवं सार्वजनिक सुविधाओं पर विशेष जोर
पूजा पंडालों के लिए कई महत्वपूर्ण मानक निर्धारित किए गए हैं। समितियों को पंडाल के निर्माण में केवल इको-फ्रेंडली एवं बायोडिग्रेडेबल सामग्री का उपयोग सुनिश्चित करने और प्लास्टिक का पूर्णतः निषेध करने का निर्देश दिया गया है। स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है। हर पंडाल परिसर में कूड़ा दान और अपशिष्ट प्रबंधन की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए, जिसके लिए विशेष सफाई दल की तैनाती की जाएगी।
पंडाल परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु सूचना केंद्र/डेस्क की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। इसके अलावा, पीने के पानी की उपलब्धता, शौचालय, प्रसाद वितरण केंद्र और श्रद्धालुओं के लिए बैठने की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है। मूर्तियों और पंडाल की सजावट में सांस्कृतिक एवं कलात्मक नवाचार को बढ़ावा देने और सामाजिक संदेशों का समावेश करने पर जोर दिया गया है।
सुरक्षा, स्वास्थ्य और महिला-बच्चों की हिफाजत
सुरक्षा के दृष्टिकोण से, सभी पंडालों में फायर सेफ्टी उपकरण एवं प्राथमिक अग्निशमन व्यवस्था अनिवार्य की गई है। भीड़ पर नियंत्रण रखने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए, सीसीटीवी कैमरा और एक कंट्रोल रूम की स्थापना जरूरी होगी। प्रवेश और निकास मार्गों पर पर्याप्त रोशनी और व्यवस्थित भीड़ नियंत्रण तंत्र होना चाहिए।
महिला एवं बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय किए गए हैं। पंडालों में महिला पुलिस बल की तैनाती की जाएगी और एक महिला हेल्प डेस्क व शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाएगा। बच्चों के लिए सुरक्षित क्षेत्र, वॉलंटियर्स की पर्याप्त मौजूदगी और एक मेडिकल सहायता केंद्र की व्यवस्था अनिवार्य है। आयोजकों को स्वास्थ्य संबंधी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करने, जैसे मास्क, सैनिटाइजर का उपयोग और भीड़ नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया है। वॉलंटियर्स और पूरे आयोजन के समुचित संचालन की जिम्मेदारी आयोजकों की होगी।
पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन की अनिवार्यता
प्रतिमा विसर्जन के लिए प्रशासन ने कड़े पर्यावरणीय अनुकूलता मानक तय किए हैं। विसर्जन की अनुमति केवल प्रशासन द्वारा चिन्हित घाटों पर ही होगी। समितियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि मूर्तियां मिट्टी से बनी हों और उनमें प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग किया गया हो।
अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके
विसर्जन स्थल (घाटों) पर सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, पुलिस बल, वॉलंटियर्स की मौजूदगी और प्राथमिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। विसर्जन उपरांत घाट की साफ-सफाई अनिवार्य होगी, और अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। सभी पूजा समितियों को विसर्जन उपरांत सफाई रिपोर्ट प्रशासन को प्रस्तुत करनी होगी, जो जन-जागरूकता एवं पर्यावरण संरक्षण के संदेशों का भी प्रचार करेंगी।
सफल आयोजन में सहयोग
जिला प्रशासन ने सभी पूजा समितियों से अपील की है कि वे इन निर्धारित मानकों का पालन करते हुए सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल दुर्गा पूजा के सफल आयोजन में सहयोग करें।