पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना
सुबह से ही शहर के घरों में पर्व की तैयारी शुरू हो गई थी। महिलाओं ने भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर अपने व्रत का संकल्प लिया। शाम होते ही शहर के मुख्य इलाकों जैसे सोनारी, साकची, कदमा, बिष्टुपुर और गोलमुरी में एक खास रौनक देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी महिलाएं पूजा स्थलों पर एकत्र हुईं, जहां उन्होंने करवा चौथ की कथा सुनी और पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
पारंपरिक निष्ठा का प्रतीक
इस दौरान जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू भी अपने पति के लिए व्रत रखकर विधिवत पूजा करती दिखीं। यह पल शहर में सामुदायिक सद्भाव और पारंपरिक निष्ठा का प्रतीक बन गया।
चांद के दीदार के साथ व्रत संपन्न
सभी की निगाहें बेसब्री से आसमान की ओर टिकी थीं। जैसे ही चंद्रमा ने दर्शन दिए, महिलाओं के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने छलनी से चांद और फिर अपने पति का चेहरा देखकर पूजा की और व्रत खोला। पतियों ने अपनी पत्नियों को पानी पिलाकर उनका उपवास तुड़वाया और उनका आशीर्वाद लिया।
वैवाहिक बंधन की गहराई को दर्शाता हुआ संपन्न
इस खास मौके पर कई स्थानों पर महिलाओं ने समूह में पूजा आयोजित की और पारंपरिक लोकगीत गाए। त्योहार के मद्देनजर बाजारों में भी जबरदस्त रौनक रही। साज-सज्जा की सामग्री, मेहंदी और मिठाइयों की दुकानों पर देर रात तक भीड़ लगी रही। करवा चौथ ने जमशेदपुर के माहौल को पूरी तरह भक्तिमय, प्रेमपूर्ण और उत्सवमय बना दिया। यह पर्व एक बार फिर भारतीय संस्कृति की अटूट आस्था और वैवाहिक बंधन की गहराई को दर्शाता हुआ संपन्न हुआ।