Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भाजपा ने अपने हिस्से की सभी 101 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है. तीन चरणों में जारी हुई सूचियों में कुल 101 उम्मीदवारों में से 49 सवर्ण चेहरे हैं. यह आंकड़ा साफ संकेत देता है कि पार्टी ने एक बार फिर अपने मूल वोट बैंक, सवर्णों और वैश्य समुदाय पर गहरी आस्था जताई है. पिछली बार 110 सीटों पर लड़ते हुए भाजपा ने 50 सवर्ण उम्मीदवार उतारे थे. इस बार भी लगभग वही संतुलन कायम रहा है.
सिर्फ सवर्ण ही नहीं, भाजपा ने वैश्य समाज पर भी भरोसा बनाए रखा है. इस चुनाव में 15 वैश्य उम्मीदवार मैदान में होंगे. हालांकि यादव उम्मीदवारों की हिस्सेदारी में गिरावट आई है. 2020 में भाजपा के टिकट पर 15 यादव उम्मीदवार थे, जबकि इस बार केवल 6 को मौका मिला है. दूसरी ओर, कुशवाहा, कुर्मी और अतिपिछड़ा समुदाय पर खास ध्यान दिया गया है. इस सूची में 10 अतिपिछड़े, 7 कुशवाहा और 2 कुर्मी उम्मीदवार शामिल हैं.
बागियों पर गिरी गाज, नये चेहरों को मिला इनाम
इस चुनाव में भाजपा ने 16 मौजूदा विधायकों का टिकट काट दिया. इनमें आरा, पटना साहिब, कुम्हरार, रिगा, औराई, राजनगर, रामनगर और नरकटियागंज जैसी महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं. रामनगर की विधायक भागीरथी देवी और नरकटियागंज की रश्मि वर्मा ने नीतीश सरकार के विश्वासमत के दौरान पार्टी लाइन का उल्लंघन किया था, जिसके परिणामस्वरूप उनका टिकट कटा.
उधर, विश्वासमत में नीतीश कुमार के पक्ष में खड़ी हुईं राजद की संगीता कुमारी (मोहनिया) और भरत बिंद (भभुआ) को भाजपा ने इनाम दिया और उन्हें उम्मीदवार घोषित कर दिया.
उम्र पर सवाल, लेकिन दोहरा पैमाना?
टिकट बंटवारे में उम्र एक विवाद का विषय बन गया. आरा के 78 वर्षीय अमरेन्द्र प्रताप सिंह, पटना साहिब के नंदकिशोर यादव, छपरा के सीएन गुप्ता और राजनगर के रामप्रीत पासवान का टिकट उम्र के आधार पर काटा गया. इसके बावजूद गया टाउन से 70 पार प्रेम कुमार का दोबारा चयन सवाल खड़ा करता है. 1990 से लगातार चुनाव जीत रहे प्रेम कुमार नौवीं बार मैदान में हैं.
इसी तरह बड़हरा से राघवेंद्र प्रताप सिंह और बांका से रामनारायण मंडल को उम्रदराज होने के बावजूद टिकट दिया गया.
युवा चेहरों की एंट्री: मैथिली और श्रेयसी सुर्खियों में
पार्टी ने युवाओं को भी मौका दिया है. अलीनगर से 25 वर्षीय लोकगायिका मैथिली ठाकुर उम्मीदवार बनी हैं, जबकि जमुई से 35 वर्षीय शूटिंग चैंपियन श्रेयसी सिंह को फिर मैदान में उतारा गया है. राजनगर से 30 वर्षीय सुजीत पासवान और औरंगाबाद से पहली बार चुनाव लड़ने जा रहे त्रिविक्रम नारायण सिंह (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह के पुत्र) को मौका दिया गया है.
बाहुबली विरासत और भावनात्मक चेहरा
शाहपुर सीट पर भाजपा ने स्वर्गीय विश्वेश्वर ओझा के पुत्र राकेश ओझा को टिकट दिया है. ओझा की 2016 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. राकेश ओझा का मुकाबला राजद के राहुल तिवारी से होगा, जो शिवानंद तिवारी के पुत्र हैं. तरारी में बाहुबली सुनील पांडेय के पुत्र विशाल प्रशांत को दोबारा मौका दिया गया है.
राघोपुर में हाई-वोल्टेज मुकाबला
राघोपुर, जो तेजस्वी यादव की सीट है, वहां से भाजपा ने सतीश कुमार यादव को दोबारा मैदान में उतारा है. सतीश 2010 में राबड़ी देवी को यहां हरा चुके हैं. इस सीट पर जनसुराज के चंचल सिंह भी उतर रहे हैं, जिससे त्रिकोणीय मुकाबले के आसार मजबूत हैं.
पूर्व अधिकारियों पर भरोसा
बक्सर से पूर्व IPS अधिकारी आनंद मिश्र को टिकट मिला है. उन्होंने 2024 में निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़ा था और बाद में जनसुराज छोड़कर भाजपा में लौट आए. गौरा बौराम से सुजीत कुमार सिंह, पूर्व IRS अधिकारी और आयकर विभाग के कमिश्नर, को उम्मीदवार बनाया गया है. खास बात यह है कि उनकी पत्नी स्वर्णा सिंह ने 2020 में VIP के टिकट पर यहां से चुनाव जीता था. चुनावी शतरंज बिछ चुकी है, अब बारी जनता के जनादेश की है.