Crimes Against Women In West Bengal: पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में सजा पाने की दर बेहद कम है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के 2017 से 2023 तक के आंकड़ों के विश्लेषण (मिडिया रिपोर्ट्स) से यह सामने आया है कि इन मामलों में औसतन सिर्फ पांच प्रतिशत मामलों में ही दोषियों को सजा मिली. 2023 में यह दर और गिरकर 3.7 प्रतिशत रह गई, जिससे राज्य देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 35वें स्थान पर आ गया.
यह स्थिति तब है जब पश्चिम बंगाल में हर साल 30,000 से अधिक महिलाओं के खिलाफ अपराध दर्ज हो रहे हैं, जो राज्य को देश के शीर्ष चार राज्यों में रखता है. सजा की इतनी कम दर का नतीजा यह भी हुआ कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सजा पाए मामलों के मुकाबले बरी किए जाने वाले मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2023 में 19,005 मामले बरी हुए, जो पिछले साल 7,996 से बहुत अधिक है और यह किसी भी राज्य में सबसे अधिक संख्या है.
साथ ही, लंबित मामलों का बोझ भी बढ़ता जा रहा है. 2023 के अंत तक पश्चिम बंगाल में 3.68 लाख मामले लंबित थे, जो 2017 के 2.34 लाख मामलों की तुलना में 56 प्रतिशत अधिक हैं.
विशेष अपराधों के आंकड़ों की समीक्षा से भी राज्य की चुनौतियां सामने आती हैं. 2018 से 2023 के बीच पश्चिम बंगाल में एसिड हमले और एसिड हमला करने के प्रयास के मामले देश में पहले स्थान पर रहे. इसी अवधि में पति या उनके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के मामलों में तीसरे स्थान पर रहा.
यह आंकड़ा पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराध और न्याय व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है. हाल ही में दुर्गापुर में कथित गैंगरेप की घटना के बाद राज्य में इस विषय पर चर्चा और सार्वजनिक चिंता भी बढ़ी है.