Ranchi Crime News: रांची की एक साधारण सी रात ने अचानक तब भयावह रूप ले लिया जब एक रेस्टोरेंट में बिरयानी की प्लेट से निकली एक हड्डी ने एक व्यक्ति की जान ले ली. यह कोई फिल्म की कहानी नहीं बल्कि राजधानी रांची का असली किस्सा है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया.
यह घटना 18 अक्टूबर की रात कांके रोड स्थित “सेफ चौपाटी” रेस्टोरेंट में हुई. कुछ ग्राहक रेस्टोरेंट पहुंचे और उन्होंने वेज बिरयानी का ऑर्डर दिया. खाना परोसे जाने के कुछ ही मिनट बाद प्लेट में एक छोटी सी चिकन की हड्डी निकल आई. ग्राहकों को गुस्सा आ गया और उन्होंने रेस्टोरेंट मालिक विजय नाग से बहस शुरू कर दी. मामूली बहस ने कुछ ही पलों में झगड़े का रूप ले लिया. गाली-गलौज और धक्का-मुक्की के बीच गोली चल गई. गोली सीधे विजय नाग को लगी और मौके पर ही उनकी मौत हो गई. रेस्टोरेंट में भगदड़ मच गई और पूरे इलाके में सनसनी फैल गई.
घटना की सूचना मिलते ही रांची पुलिस हरकत में आ गई. एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर और डीएसपी अमर पांडे की देखरेख में एक विशेष टीम गठित की गई. जांच के दौरान हत्या में शामिल तीन आरोपियों, प्रशांत कुमार सिंह, अभिषेक सिंह और हरेन्द्र सिंह के नाम सामने आए. प्रशांत को सबसे पहले गिरफ्तार किया गया, फिर उसकी निशानदेही पर बाकी आरोपियों की तलाश शुरू हुई.
पुलिस को सूचना मिली कि मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह अपनी गर्भवती पत्नी से मिलने रांची आने वाला है. 19 अक्टूबर की रात आईटीबीपी कैंप के पास नाकेबंदी की गई. जैसे ही अभिषेक की कार वहां पहुंची, पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया. लेकिन उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई और अभिषेक के दोनों पैरों में गोली लगी. उसे घायल अवस्था में रिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया. पूछताछ में अभिषेक ने कबूल किया कि उसे हथियार हरेन्द्र सिंह ने उपलब्ध कराए थे.
इसके बाद पुलिस ने पतरातू घाटी में चलाए गए एंटी क्राइम अभियान के दौरान हरेन्द्र सिंह को गिरफ्तार किया. उसके पास से दो पिस्टल, एक रायफल, एक देशी कट्टा, 26 गोलियां, दो मोबाइल फोन और दो लाख चार हजार रुपये नकद बरामद हुए. पुलिस ने अभिषेक के पास से भी कार, पिस्टल और कई गोलियां जब्त कीं.
पुलिस का कहना है कि इस मामले का चौथा आरोपी अमित ठाकुर अभी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. अधिकारियों को उम्मीद है कि वह जल्द पुलिस की गिरफ्त में होगा.
“चौपाटी मर्डर केस” सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि उस सामाजिक असंतुलन की कहानी है जो आज की शहरी जिंदगी में गहराई तक समा गया है. एक छोटी सी गलती या बहस किस तरह हिंसा का रूप ले सकती है, यह इस केस ने दिखा दिया. ग्राहक और दुकानदार के बीच का विवाद अगर संवाद से सुलझाया जाता, तो एक जान बच सकती थी और कई जिंदगियां बर्बाद होने से बच जातीं.
यह घटना कानून-व्यवस्था के साथ-साथ समाज के भीतर बढ़ती असहिष्णुता पर भी गंभीर सवाल उठाती है. एक हड्डी के लिए चली गोली यह बताती है कि क्रोध और अहंकार किस तरह इंसान की समझ को खत्म कर देते हैं. पुलिस की तत्परता और कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह भी साफ है कि हथियारों की आसान उपलब्धता और अपराधियों की मानसिकता आज भी हमारे सिस्टम के लिए चुनौती बनी हुई है.
इस घटना ने न सिर्फ एक रेस्टोरेंट मालिक की जान ली, बल्कि यह भी दिखाया कि आधुनिक समाज में धैर्य और संवाद की संस्कृति कितनी तेजी से खत्म होती जा रही है.