Jharkhand News: गढ़वा जिले में मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है. जिला गव्य विकास पदाधिकारी गिरीश कुमार ने औपबंधिक रूप से सूचीबद्ध पशु आपूर्तिकर्ता उपेन्द्र यादव के खिलाफ लगभग 29 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई है. आरोप है कि यादव ने योजना के तहत दुधारू पशुओं की आपूर्ति में गड़बड़ी कर सरकारी राशि का गबन किया है. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
मामला वित्तीय वर्ष 2020-21 से जुड़ा हुआ है. उपेन्द्र यादव को गढ़वा जिले में 187 दुधारू पशुओं की आपूर्ति का कार्य मिला था. रांची स्थित गव्य विकास निदेशालय की जांच में तीन प्रमुख अनियमितताएं उजागर हुई हैं. पहली, पशुओं की कीमत में हेराफेरी कर वास्तविक मूल्य से कम दिखाकर सरकार से 25,45,607 रुपये अधिक लिए गए. दूसरी, बीमा प्रीमियम में घोटाला जिसमें 2,61,392 रुपये की अतिरिक्त राशि ली गई और तीसरी, उपस्कर जैसे बाल्टी और रस्सी के नाम पर 1,00,626 रुपये की राशि का गबन किया गया. कुल मिलाकर 29,07,625 रुपये की राशि का गबन यादव द्वारा किया गया.
जांच में यह भी सामने आया कि बीमा प्रक्रिया में तत्कालीन जिला गव्य विकास पदाधिकारी की भूमिका संदिग्ध रही है जिससे विभागीय मिलीभगत की संभावना को नकारा नहीं जा सकता. गढ़वा पुलिस ने यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जांच में और भी नाम उजागर हो सकते हैं.
यह मामला केवल एक आपूर्तिकर्ता की लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी योजना में व्यवस्थागत कमी और अधिकारियों की मिलीभगत का संकेत देता है. यदि समय रहते प्रभावी जांच और जवाबदेही नहीं बनाई गई, तो ऐसे घोटाले योजनाओं के मूल उद्देश्य को नष्ट कर सकते हैं और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को बढ़ावा देंगे.