Bihar: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल पर एक विस्तृत पोस्ट जारी करते हुए कहा कि “बिहार में अब लालटेन युग कभी नहीं लौटेगा।” उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 से पहले राज्य में बिजली की हालत बेहद खराब थी — राजधानी पटना में भी मुश्किल से 7 से 8 घंटे ही बिजली मिलती थी, ग्रामीण इलाकों में तो बिजली नाम की चीज नहीं थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 से
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 से पहले राज्य में अधिकतम 700 मेगावाट बिजली की आपूर्ति होती थी और उत्पादन लगभग नगण्य था। गांवों में लोग बिजली के तारों पर कपड़े सुखाते थे क्योंकि बिजली कभी आती ही नहीं थी।
उन्होंने कहा कि 24 नवंबर 2005 को
उन्होंने कहा कि 24 नवंबर 2005 को सरकार बनने के बाद बिजली सुधार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
2012 में बिहार राज्य विद्युत बोर्ड को समाप्त कर पाँच विद्युत कंपनियाँ बनाई गईं और ग्रामीण विद्युतीकरण अभियान तेज़ किया गया।
हर घर बिजली निश्चय योजना के तहत अक्टूबर 2018 तक सभी इच्छुक घरों तक कनेक्शन पहुँच गया।
नीतीश कुमार ने कहा कि अगर हमने बिजली की स्थिति नहीं सुधारी तो 2015 में वोट मांगने नहीं आऊंगा यह वादा उन्होंने निभाया।
मुख्यमंत्री के अनुसार अब बिहार में
मुख्यमंत्री के अनुसार अब बिहार में बिजली आपूर्ति 700 मेगावाट से बढ़कर 8 हजार मेगावाट से ज्यादा हो चुकी है, जबकि बिजली उत्पादन क्षमता 540 मेगावाट से बढ़कर 8,850 मेगावाट तक पहुँच गई है। राज्य में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 75 यूनिट से बढ़कर 363 यूनिट, और उपभोक्ता संख्या 17 लाख से बढ़कर 2.25 करोड़ हो गई है।
उन्होंने कहा कि किसानों को मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट
उन्होंने कहा कि किसानों को मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट की दर पर सस्ती बिजली दी जा रही है और कृषि फीडर के लिए सरकार ने 4,395 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है। साथ ही सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा भी की गई है।
नीतीश कुमार ने बताया कि
नीतीश कुमार ने बताया कि राज्य में अब 172 ग्रिड उपकेंद्र, 1,260 विद्युत शक्ति उपकेंद्र, और 3.5 लाख वितरण ट्रांसफॉर्मर हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले तीन वर्षों में हर घर की छत या सार्वजनिक स्थल पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का लक्ष्य है ताकि बिहार पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके।