Jamshedpur: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को शनिवार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब कोल्हान क्षेत्र के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कदमा स्थित आवासीय कार्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की मौजूदगी में पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। यह घटनाक्रम आगामी चुनाव से ठीक पहले हुआ है, जिसे झारखंड की सियासत में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
चंपाई सोरेन के पार्टी छोड़ने से झामुमो को कोल्हान में संगठनात्मक पकड़ बनाए रखने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि आदिवासी वोट बैंक में चंपाई सोरेन का प्रभाव काफी मजबूत रहा है। इस दौरान सरायकेला विधायक प्रतिनिधि सनंद आचार्य ने झामुमो नेता कुणाल सारंगी के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया भी दी।
भाजपा में शामिल आदिवासी बोले “अब विकास चाहिए”
घाटशिला उपचुनाव के लिए भाजपा उत्साहित है। लगातार मिल रहे जमीनी संकेतों के आधार पर पार्टी ने दावा किया है कि झामुमो का यह पारंपरिक गढ़ ढह रहा है और भाजपा ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रही है।
पिछले कुछ दिनों में चंपाई सोरेन के नेतृत्व में झाटीझरना पंचायत और गुड़ाबांधा प्रखंड सहित कई गांवों के ग्राम प्रधानों, पारंपरिक मांझी बाबाओं समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने भाजपा का दामन थामा।
स्थानीय लोगों ने बताया कि वर्षों तक झामुमो को समर्थन देने के बाद भी क्षेत्र में सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं का अभाव है। अब वे परिवर्तन चाहते हैं और भाजपा से विकास की उम्मीद कर रहे हैं।
चंपाई सोरेन का निशाना “केवल भाजपा ही दे सकती है विकास”
भाजपा में शामिल होते हुए चंपाई सोरेन ने कहा कि घाटशिला की जनता समझ चुकी है कि केवल भाजपा ही विकास की गारंटी दे सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि फूलपाल, जुगीशोल और बेदिया सहित कई इलाकों में बांग्लादेशी घुसपैठिए सरकारी व सामाजिक जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं।
सोरेन ने चेताया
“समाज के अस्तित्व की रक्षा के लिए आदिवासियों और मूलवासियों को एकजुट होना होगा।”
चाईबासा लाठीचार्ज मामले पर उन्होंने राज्य सरकार पर हमला करते हुए कहा
“सरकार आपकी, लाठीचार्ज आप करवाओ, आंसू गैस आप चलवाओ, फर्जी FIR आप करवाओ, लोगों को जेल में भेजो… और गलती विपक्ष की बताओ? जनता को बेवकूफ बनाना बंद करो।”
आदिवासी नेतृत्व की अपील
इस कार्यक्रम में संथाल परगना से आए “देश परगना” सूरजू टुडू भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को अपनी विरासत और अस्तित्व की रक्षा के लिए भाजपा प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन को समर्थन देना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी
“अगर बांग्लादेशी घुसपैठियों को नहीं रोका गया, तो जैसे पाकुड़ में आदिवासी समाज अल्पसंख्यक हो गया है, वैसे ही स्थिति यहां भी बन सकती है।”
कोल्हान और घाटशिला में हो रहे राजनीतिक फेरबदल ने उपचुनाव का माहौल गर्म कर दिया है। अब देखना होगा कि झामुमो इस झटके से कैसे उभरता है और भाजपा अपने “ऐतिहासिक जीत” के दावे को कितना सच साबित कर पाती है।