Jharkhand News: अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया में फंसे झारखंड के सभी 48 प्रवासी कामगार आखिरकार सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के त्वरित हस्तक्षेप और संवेदनशील पहल के कारण यह संभव हो पाया. तीन जत्थों में इन कामगारों की वापसी कराई गई. पहले 31, फिर 9 और अब शेष 8 कामगार भी झारखंड लौट आए हैं.
जानकारी के अनुसार ये सभी मजदूर बीते तीन महीनों से ट्यूनीशिया में फंसे हुए थे और उन्हें वहां काम करने के बावजूद वेतन नहीं मिल रहा था. आर्थिक तंगी और असुरक्षा के बीच उन्होंने राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई थी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के अधीन राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष को तुरंत सक्रिय किया.
मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग ने भारतीय दूतावास और संबंधित एजेंसियों के सहयोग से पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया. अब सभी मजदूर सुरक्षित रूप से हजारीबाग, गिरिडीह और बोकारो अपने घर लौट चुके हैं. ये सभी पीसीएल प्रेम पावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड में कार्यरत थे.
राज्य सरकार ने इन कामगारों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है. श्रम विभाग के अधिकारियों ने लौटे मजदूरों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को विस्तार से समझा और आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया है.
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि प्रवासी मजदूरों की समस्याएं सिर्फ देश के भीतर ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी गंभीर रूप ले रही हैं. बेहतर रोजगार की तलाश में दूर देशों में जाने वाले कामगार कई बार शोषण और असुरक्षा का शिकार बन जाते हैं. ऐसे में राज्य सरकारों की तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण ही उनके लिए उम्मीद की किरण साबित होती है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की यह पहल न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी का उदाहरण है बल्कि यह संदेश भी देती है कि प्रवासी कामगारों का दर्द अब अनसुना नहीं रहेगा.