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  • 2025-11-10

Jharkhand Big News: IAS विनय चौबे की मुश्किलें बढ़ीं, लैंड स्कैम में भी बने आरोपी

Jharkhand Big News: झारखंड के आईएएस अधिकारी विनय चौबे की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. पहले से ही शराब घोटाले और हजारीबाग के खासमहल जमीन घोटाले के मामले में जेल में बंद विनय चौबे पर अब एक और गंभीर आरोप लगा है. एसीबी यानी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उन्हें हजारीबाग में उनके कार्यकाल के दौरान हुए वन भूमि घोटाले में भी आरोपी बनाया है.

एसीबी ने इस मामले की जांच पूरी कर ली है और अब कोर्ट में विनय चौबे की रिमांड के लिए आवेदन दिया है. संभावना है कि इस पर मंगलवार को सुनवाई होगी. रांची एसीबी ने कांड संख्या 11/2025 दर्ज कर इस घोटाले में विनय चौबे सहित कुल 73 लोगों को नामजद किया है. इनमें उनके करीबी विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन सीओ शैलेश कुमार और ब्रोकर विजय सिंह के नाम शामिल हैं.

इस मामले में एसीबी ने सितंबर महीने में विनय सिंह को गिरफ्तार किया था. वहीं, पिछले महीने शैलेश कुमार और विजय सिंह को भी हिरासत में लिया गया है. अब एजेंसी विनय सिंह की पत्नी स्निग्धा सिंह की तलाश कर रही है. एसीबी को जांच के दौरान मिले सबूतों और गवाहों के बयानों से यह स्पष्ट हुआ कि विनय चौबे की इस लैंड स्कैम में सीधी भूमिका रही है, जिसके बाद उन्हें भी आरोपी बनाया गया है.

इस केस में आरोपी बनाए जाने के बाद विनय चौबे अब तक तीन अलग-अलग मामलों में अभियुक्त हो चुके हैं. एसीबी के अनुसार, जिस जमीन को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई है, वह विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के नाम पर है. इस भूमि की खरीद, म्यूटेशन और कब्जे में तत्कालीन डीसी विनय चौबे और अंचल अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही.

यह विवादित भूमि हजारीबाग के सदर अंचल के थाना नंबर 252 के अंतर्गत आती है. इसका खाता नंबर 95 और प्लाट नंबर 1055, 1060 और 848 है, जिसका कुल रकबा 28 डिसमिल बताया गया है. वहीं खाता नंबर 73, प्लाट नंबर 812 की जमीन का रकबा 72 डिसमिल है. यह जमीन सदर अंचल के बभनवे मौजा के हल्का नंबर 11 में स्थित है. फिलहाल इस भूमि पर नेक्सजेन नाम से एक शोरूम संचालित है, जिस पर विनय सिंह और उनकी पत्नी का कब्जा बताया गया है.

एसीबी की ताजा कार्रवाई ने झारखंड की नौकरशाही में हलचल मचा दी है. आईएएस विनय चौबे का नाम अब लगातार तीसरे घोटाले में सामने आया है, जिससे यह साफ झलकता है कि सत्ता और पद का दुरुपयोग किस हद तक हुआ. यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह प्रभावशाली अधिकारी और स्थानीय राजनीतिक नेटवर्क मिलकर सरकारी जमीनों को हड़पने में लगे हुए हैं. अगर एसीबी इस मामले में आरोपों को साबित करने में सफल रही, तो यह राज्य के लिए एक बड़ा मिसाल बन सकता है, जहां कानून और जवाबदेही की ताकत फिर से स्थापित हो सकेगी.
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