Jharkhand Big News: रांची से संचालित अवैध कफ सिरप सप्लाई के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होने के बाद राजधानी में हड़कंप मच गया है. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कोडिन फॉस्फेटयुक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री का मामला सामने आने के बाद वहां दर्ज प्राथमिकी के आधार पर रांची के कोतवाली थाना में भी शैली ट्रेडर्स के संचालक समेत 28 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है.
रांची के तुपुदाना इलाके में स्थित शैली ट्रेडर्स पर आरोप है कि उसने फेंसेडाइल नामक कफ सिरप की बड़े पैमाने पर आपूर्ति की. फेंसेडाइल का इस्तेमाल नशे के तौर पर किया जाता है और इसके दुष्प्रभाव बेहद गंभीर माने जाते हैं. धनबाद में पिछले दिनों जब्त कफ सिरप की जांच में पाया गया था कि इसमें कोडिन की मात्रा चार किलो से अधिक थी. इतनी अधिक मात्रा शरीर पर हेरोइन जैसा असर करती है.
वाराणसी में हुई कार्रवाई के बाद खुलासा हुआ कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच रांची की शैली ट्रेडर्स ने एबोट हेल्थ केयर से लगभग 89 लाख रुपये की फेंसेडाइल खरीदी थी. इसके बाद इन दवाओं की लगभग 100 करोड़ की सप्लाई उत्तर प्रदेश के 93 थोक विक्रेताओं को भेजी गई. अकेले वाराणसी के 26 मेडिकल स्टोरों पर लगभग 50 करोड़ की कफ सिरप भेजी गई थी. जांच में यह भी पाया गया कि जिन व्यापारियों को सप्लाई की गई थी, उनके पास बिक्री का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था. कई दुकानें बंद मिलीं.
रांची के कोतवाली में दर्ज प्राथमिकी में शैली ट्रेडर्स के संचालक भोला प्रसाद, उनके बेटे शुभम जायसवाल और वाराणसी के 26 थोक दवा विक्रेताओं के नाम शामिल हैं.
इस मामले में झारखंड पुलिस के कामकाज पर भी गंभीर सवाल उठे हैं. जांच में जुटे अधिकारियों का कहना है कि बार-बार सूचना मिलने के बावजूद सीआईडी और हटिया तुपुदाना पुलिस कार्रवाई से बचती रही. धनबाद के बरवाअड्डा से जब बड़ी मात्रा में कफ सिरप बरामद हुई और दो नवंबर को रांची के मांडर थाना क्षेत्र से 13 हजार से अधिक बोतल फेंसेडाइल मिली, तब भी शैली ट्रेडर्स पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. अब जब वाराणसी में पूरा नेटवर्क पकड़ में आया तो रांची में प्राथमिकी दर्ज की गई है.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आशंका जताई है कि इतनी बड़ी सप्लाई के बावजूद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होना अपने आप में सवाल खड़ा करता है. उन्होंने यह भी कहा कि क्या झारखंड पुलिस किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रही थी.
यह मामला सिर्फ अवैध कफ सिरप सप्लाई का नहीं बल्कि राज्यों के बीच सक्रिय गहरे नेटवर्क का संकेत देता है. जांच से यह भी जाहिर होता है कि कोडिन आधारित कफ सिरप की अवैध बिक्री कितनी व्यवस्थित तरीके से होती रही और प्रशासनिक मशीनरी की सुस्ती या उदासीनता ने इसे और बढ़ावा दिया. फेंसेडाइल जैसे जहरीले कफ सिरप की अनियंत्रित बिक्री बच्चों और युवाओं के लिए गंभीर खतरा है. यह मामले राज्यस्तरीय समन्वय, सख्त नियमन और पुलिस की जवाबदेही की आवश्यकता को भी दिखाता है.