Jamshedpur Crime News: जमशेदपुर के बिरसानगर थाना क्षेत्र में इंजीनियरिंग कंपनी के कार्यालय से 10 लाख रुपए से अधिक की मजदूरी राशि और दो मोबाइल की लूट के मामले में पुलिस ने तेजी दिखाते हुए 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. लूट की यह वारदात कंपनी में मजदूरों को दिया जाने वाला वेतन बांटने के दौरान हुई थी. अज्ञात अपराधियों ने हथियार दिखाकर रकम लूट ली थी और फरार हो गए थे.
टीम ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें से एक कंपनी में ही पिछले तीन महीने से वेल्डर के रूप में काम कर रहा था. पुलिस पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसे हर महीने की दस तारीख को मजदूरी भुगतान की पूरी जानकारी होती थी. इसी वजह से उसने अपने तीन साथियों को साथ लेकर वारदात की योजना बनाई. पूछताछ में यह भी सामने आया कि लूटी गई रकम को चारों ने बांट लिया था.
आपको बता दें कि लूट के समय कंपनी के तरफ से कहा गया था कि 10 लाख से अधिक की लूट हुई है लेकिन जब पुलिस ने पड़ताल किया तो यह लूट साढ़े 4 लाख रुपए की थी. लूटे गये पैसा को चारो ने 1,15000 रूपया करके बांट लिया था. इनके निशानदेही पर लूटे गये पैसा 1,23000 बरामद हुए है, जिसमें अजीत बेहरा से 45000 एंव बाबु सरदार उर्फ नेपु से 78000 रूपया को बरामद किया गया. पुलिस ने एक देसी कट्टा, दो जिंदा गोली, घटना में प्रयुक्त स्कूटी, हेलमेट और लूटे गए पैसों से खरीदा गया एक मोबाइल भी जब्त किया है. मोबाइल को आरोपी ने पकड़े जाने के डर से घटना के बाद रास्ते में फेंक दिया था. टीम अन्य फरार साथियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है.
घटना की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक नगर के मार्गदर्शन में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया. टीम ने शहर के विभिन्न इलाकों के सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी इनपुट के आधार पर जांच आगे बढ़ाई. जांच में शामिल अधिकारियों ने फुटेज का गहन विश्लेषण कर सभी संदिग्धों की पहचान करने में सफलता हासिल की.
कार्रवाई करने वाले दल में प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक, बिरसानगर थाना प्रभारी और तकनीकी शाखा के अधिकारी शामिल थे. पुलिस ने बताया कि एक आरोपी पहले भी आर्म्स एक्ट के मामले में गिरफ्तार हो चुका है.
यह लूट एक सोची समझी अंदरूनी साजिश का नतीजा थी, क्योंकि मुख्य आरोपी कंपनी का कर्मचारी था और उसे पैसे की आवाजाही का पूरा ज्ञान था. ऐसे मामलों में कंपनियों को कैश मूवमेंट की जानकारी बेहद सीमित लोगों तक रखने की जरूरत है. जिस तरह जांच टीम ने सीसीटीवी और तकनीकी इनपुट का उपयोग कर कम समय में आरोपियों को पकड़ लिया, वह साफ दिखाता है कि पुलिस की प्रतिक्रिया तेजी से बदल रही है. हालांकि दो आरोपी अभी फरार हैं, जो यह संकेत देता है कि शहर में सक्रिय छोटे गिरोह संगठित तरीके से वारदातों को अंजाम दे रहे हैं. ऐसे अपराधों पर लगाम लगाने के लिए निगरानी और खुफिया तंत्र को और मजबूत करना होगा.