ईचागढ़ : झारखंड राज्य गठन से पहले स्थापित ऐतिहासिक और पुराना थाना ईचागढ़, अपनी ईमानदार छवि, जनता से मधुर संबंध और मजबूत पुलिस-पब्लिक तालमेल के लिए जाना जाता रहा है। वर्षों से कई थाना प्रभारी यहां पदस्थापित हुए, जिन्होंने जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और मीडिया से सौहार्दपूर्ण रिश्ता रखते हुए शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखा। आज भी क्षेत्रवासी उन पुराने पदाधिकारियों को सम्मान से याद करते हैं।
लेकिन इसी स्वच्छ छवि वाले थाना को हाल के दिनों में तब बड़ा झटका लगा, जब थाना प्रभारी रहे विक्रमांदित्य पांडेय पर गंभीर आरोपों की लंबी फेहरिस्त सामने आई। उनके कार्यकाल में उठे विवादों ने थाना की पुरानी साख पर प्रश्नचिह्न लगा दिया।
अवैध वसूली से लेकर संरक्षण तक—कारोबार पर बरसीं शिकायतें
विक्रमांदित्य पांडेय पर आरोप है कि उन्होंने अवैध तरीके से बालू परिवहन कर रहे वाहनों से प्रति हाइवा ट्रिप आठ हजार रुपये तक वसूली की। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम जनता ने इस बाबत सीधे डीजीपी को शिकायत भेजी थी। क्षेत्र में अवैध स्क्रैप कारोबार को संरक्षण देने के आरोप भी जोर पकड़ते रहे, कई मीडिया रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया जा चुका है। बताया जाता है कि इस पूरे कारोबार से जुड़े कई दलालों की सक्रियता अचानक बढ़ गई थी, जिनके तार कथित रूप से थाना परिसर तक जुड़ते देखे गए।
राजनीतिक नेता पर अत्याचार का आरोप
विवाद यहीं नहीं रुका। JLKM के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी तरुण महतो को पुलिस कस्टडी में गंभीर रूप से घायल किए जाने का आरोप भी पांडेय पर लगा। मामले ने अचानक राजनीतिक रंग ले लिया और ग्रामीणों में आक्रोश गहराने लगा। पुलिस-जनता संबंधों की नींव डगमगाने लगी।
गौ तस्करी से नाम जुड़ने की चर्चाएं और बढ़ा विवाद
क्षेत्र में गौ तस्करी को लेकर भी उनके नाम की चर्चाएं उभरती रहीं। हालांकि आधिकारिक रूप से इस मामले में कोई ठोस लिखित शिकायत नहीं आई, लेकिन गांव-गांव में यह चर्चा तेज रही कि थाना परिसर की ‘संरक्षण छाया’ तस्करों को बल दे रही है।
एसपी मुकेश लूनायत की सख्ती—थाना प्रभारी लाइन हाजिर
आधारों की बढ़ती संख्या और पुलिस छवि पर पड़ते दुष्प्रभाव को देखते हुए जिले के पुलिस कप्तान मुकेश लूनायत ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विक्रमांदित्य पांडेय को ईचागढ़ थाना से हटाकर लाइन हाजिर कर दिया। यह कदम जनता के बीच राहत और विश्वास की भावना के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो स्थिति और बिगड़ सकती थी।
नए थानेदार के सामने बड़ी चुनौती
अब ईचागढ़ थाना की कमान बजरंग महतो के हाथों में दी गई है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है— वर्षों में बनी पुलिस-पब्लिक की दूरियों को कम करना। विश्वास बहाली की प्रक्रिया को गति देना। पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करना। विवादों से घिरे थाना परिसर की साख को पुनः स्थापित करना। स्थानीय ग्रामीणों की उम्मीदें उनसे काफी जुड़ी हैं और लोग चाहते हैं कि ईचागढ़ फिर से अपने पुराने गौरव को हासिल करे।
ईचागढ़ थाना सदैव ईमानदारी, अनुशासन और जनता के साथ समन्वय की मिसाल रहा है। जिले के अन्य थानों की तुलना में यहां के पदाधिकारियों पर लाइन हाजिर या निलंबन जैसी कार्रवाई नगण्य रही। लेकिन एक विवादित कार्यकाल ने इस विश्वास को झकझोर दिया है। अब आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नया नेतृत्व जनता के टूटे भरोसे को कितनी जल्दी और किस तरह जोड़ पाता है।