Jharkhand News: झारखंड में स्कूली परीक्षाओं को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित है. कक्षा 8वीं 9वीं और 11वीं की वार्षिक परीक्षा अब दो टर्म में कराने का प्रस्ताव JAC ने तैयार कर स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग को भेज दिया है. विभाग की मंजूरी के बाद नया पैटर्न लागू होगा. इस बदलाव का असर करीब 13 लाख विद्यार्थियों पर पड़ेगा.
टर्म आधारित परीक्षा का नया मॉडल
विभाग पहले इन परीक्षाओं को जेसीइआरटी के माध्यम से कराने के पक्ष में था लेकिन JAC ने इसका विरोध किया. इसके बाद बोर्ड ने अपनी ओर से नया मॉडल दिया जिसमें परीक्षाएं एक बार में न होकर दो चरणों में आयोजित होंगी. दोनों परीक्षाओं का पैटर्न भी अलग रखा जाएगा.
कैसा होगा नया एग्जाम पैटर्न
नए प्रस्ताव के अनुसार दोनों टर्म 40 अंकों के होंगे. दोनों टर्म के अंकों को मिलाकर संयुक्त परिणाम अप्रैल में जारी किया जाएगा. प्रत्येक विषय में 20 अंकों का आंतरिक मूल्यांकन भी जोड़ा जाएगा.
टर्म 1 परीक्षा, जनवरी में
- परीक्षा लिखित उत्तरपुस्तिका पर
- कक्षा 8वीं और 9वीं की परीक्षा जनवरी में
- कक्षा 11वीं की परीक्षा मार्च के पहले सप्ताह में
- कुल अंक 40
टर्म 2 परीक्षा, फरवरी से मार्च
- परीक्षा OMR पर
- 8वीं और 9वीं की परीक्षा फरवरी के अंतिम सप्ताह में
- 11वीं की परीक्षा मार्च में
- कुल अंक 40
अंतिम परिणाम दोनों टर्म के अंकों को जोड़कर तैयार होगा और अप्रैल में जारी किया जाएगा.
कितने विद्यार्थी होंगे प्रभावित
- कक्षा 8वीं. 4.99 लाख
- कक्षा 9वीं. 4.70 लाख
- कक्षा 11वीं. 3.47 लाख
- कुल प्रभावित विद्यार्थी लगभग 13 लाख
पहले कैसी होती थी परीक्षाएं
पुरानी प्रणाली में कई खामियां थीं जिनसे छात्र और विद्यालय दोनों परेशान रहते थे. पुरानी व्यवस्था में परीक्षाएं पूरी तरह OMR पर होती थीं और सभी प्रश्न बहुविकल्पीय होते थे. आठवीं में एक दिन में पांच विषय, कई बार तीन विषयों की परीक्षा एक साथ होती थी. नौवीं में हिंदी अंग्रेजी और गणित विज्ञान की परीक्षा एक ही दिन ली जाती थी. सामाजिक विज्ञान और अतिरिक्त विषय भी एक ही दिन होते थे. 11वीं में भी एक दिन में दो विषय की परीक्षा होती थी. पुराना मॉडल मैट्रिक और इंटर के पैटर्न से अलग था और छात्रों के लिए बोझिल माना जाता था. परीक्षा और रिजल्ट में देरी से पढ़ाई भी प्रभावित होती थी.
JAC ने क्यों किया विरोध
विभाग ने पहले 1 से 11 तक की परीक्षाएं विद्यालय स्तर पर कराने का प्रस्ताव रखा था और प्रश्न पत्र जेसीइआरटी तैयार करने वाला था. JAC का तर्क था कि यह मॉडल पारदर्शी नहीं है. इससे निगरानी और मूल्यांकन प्रभावित होंगे. JAC ने कहा कि यह व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है और परीक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है. इसी कारण निर्णय लंबित रह गया.
पहले भी 1 से 11 तक की परीक्षाएं विद्यालय स्तर पर ही होती थीं और JAC केवल प्रश्न पत्र तैयार करता था. नई व्यवस्था पर चर्चा पुराने मॉडल की कमियों और नई जरूरतों के बीच संतुलन खोजने का प्रयास है.
झारखंड में प्रस्तावित दो टर्म परीक्षा प्रणाली शिक्षण प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा सकता है. पुरानी OMR आधारित व्यवस्था छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डालती थी और मूल्यांकन अधूरा रह जाता था. लिखित आधारित और OMR आधारित दोनों परीक्षा प्रारूप को शामिल करने से सीखने की गुणवत्ता का आकलन बेहतर होगा. JAC और विभाग के बीच मतभेद से साफ है कि परीक्षा मॉडल सिर्फ तकनीकी मुद्दा नहीं बल्कि प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता से भी जुड़ा है. नए पैटर्न को लागू करने से स्कूलों पर काम का बोझ बढ़ेगा लेकिन छात्रों के लिए यह बदलाव अधिक संतुलित और शैक्षणिक रूप से उपयोगी साबित हो सकता है.