Jharkhand News: दक्षिण अफ्रीका के कैमरून में फंसे झारखंड के पांचों प्रवासी मजदूरों की वतन वापसी मंगलवार को तय हो गई है. लंबे समय से बकाया वेतन न मिलने और समस्याओं का सामना कर रहे मजदूरों के मुद्दे पर भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप के बाद समाधान निकल आया है. मजदूरों को बकाया वेतन का भुगतान कर दिया गया है और अब उनकी घर वापसी की प्रक्रिया पूरी हो रही है.
परिजनों ने झारखंड सरकार और इस मामले में लगातार पहल करने वाले समाजसेवी सिकंदर अली के प्रति आभार जताया है. साथ ही इस मुद्दे को सामने लाने के लिए मीडिया को भी धन्यवाद दिया गया है.
मजदूरों के विदेश में फंसे होने की जानकारी मिलते ही परिवारों की चिंता बढ़ गई थी. परिजन लगातार सरकार से सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे थे. कैमरून में फंसे मजदूरों में हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ के सुनील महतो, सुकर महतो, करगालो के चंद्रशेखर कुमार, डीलों महतो और गिरिडीह के डुमरी के दिलचंद महतो शामिल हैं.
इन मजदूरों ने अपनी परेशानियों का वीडियो समाजसेवी सिकंदर अली को भेजा था. इसके बाद सिकंदर अली ने वीडियो को मीडिया में साझा किया और केंद्र तथा राज्य सरकार से हस्तक्षेप कर मजदूरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग की थी. वीडियो सामने आने के बाद झारखंड और केंद्र सरकार ने सक्रियता दिखाई और अंततः सभी मजदूरों की वापसी का रास्ता साफ हुआ.
सिकंदर अली ने कहा कि रोजगार की तलाश में लोग विदेशों का रुख करते हैं और इस दौरान कई बार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को देखते हुए सरकार को प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और सहायता के लिए और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है.
इस पूरे प्रकरण में एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ कि विदेशों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर संकट के समय बेहद असुरक्षित स्थिति में आ जाते हैं. समय पर सरकारी हस्तक्षेप और समाजसेवा से जुड़े लोगों की सक्रियता से स्थिति सुधरी, लेकिन यह भी सामने आया कि प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और निगरानी के लिए एक मजबूत प्रणाली की आवश्यकता है. राज्य और केंद्र सरकारों को ऐसी घटनाओं के मद्देनजर दीर्घकालिक नीतिगत तैयारी करनी होगी ताकि भविष्य में किसी मजदूर को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े.