Jharkhand News: राज्य सरकार ने लंबे समय से चली आ रही बिल क्लर्क की कमी को दूर करने के लिए नया एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी कर दिया है. अब जिन दफ्तरों में नियमित बिल क्लर्क उपलब्ध नहीं हैं, वहां प्रतिनियुक्त कर्मियों को ही इस भूमिका में मैप कर बिलिंग संबंधी कार्य कराया जाएगा. नए प्रावधानों के लागू होते ही बिल पासिंग और वित्तीय कार्यों में आ रही दिक्कतों को दूर करने की उम्मीद है.
सरकार की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि पहले मौजूद एसओपी को 12 अगस्त 2025 से समाप्त माना जाएगा. नए नियम के साथ अब डीडीओ स्तर पर ही बिल क्लर्क की मैपिंग की प्रक्रिया को सरल और ऑनलाइन कर दिया गया है.
कैसे होगी मैपिंग की प्रक्रिया
नए एसओपी के तहत जिस कार्यालय में बिल क्लर्क नहीं है, वहां प्रतिनियुक्त कर्मचारी को बिल क्लर्क की जिम्मेदारी दी जाएगी. इसके लिए संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी ऑनलाइन आग्रह करेंगे. अनुमति मिलने के बाद प्रतिनियुक्त कर्मी को बिल क्लर्क के रूप में जोड़ा जा सकेगा. इससे सरकारी कार्यालयों में बिल की प्रोसेसिंग अब बाधित नहीं होगी और समय पर भुगतान संभव हो सकेगा.
किन कार्यालयों में लागू होगा प्रावधान
- यह व्यवस्था उन डीडीओ कार्यालयों के लिए है, जहां कोई नियमित बिल क्लर्क नहीं है.
- जहां बिल क्लर्क की कमी है, वहां प्रतिनियुक्त कर्मचारी को बिल क्लर्क बनाना अनिवार्य किया गया है.
- डीडीओ बिल प्रबंधन प्रणाली में लॉग इन कर ऑनलाइन अनुरोध भेजेंगे.
नया एसओपी वित्तीय प्रक्रियाओं को सुचारू बनाने की दिशा में अहम कदम है. लंबे समय से कई सरकारी दफ्तरों में बिल क्लर्क के पद खाली होने की वजह से भुगतान और बिल पासिंग की प्रक्रिया प्रभावित होती रही है. प्रतिनियुक्त कर्मियों को बिल क्लर्क की भूमिका में मैप करना एक तात्कालिक लेकिन प्रभावी समाधान माना जा रहा है. इससे न सिर्फ कार्य गति बढ़ेगी, बल्कि विभागीय फाइलिंग और वित्तीय अनुशासन में भी सुधार की संभावना है. सरकार के इस कदम से भविष्य में वित्तीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी मजबूत हो सकती है.