टाटानगर आरपीएफ ने एक बार फिर सतर्कता का परिचय देते हुए मानव तस्करी की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान पश्चिम सिंहभूम जिले की पांच नाबालिग लड़कियों को तमिलनाडु ले जाने से पहले ही बचा लिया गया। जानकारी के अनुसार लड़कियों को सड़क मार्ग के जरिए चाईबासा से टाटानगर लाया जा रहा था।
इसी दौरान रास्ते में संदिग्ध गतिविधि दिखने पर आरपीएफ ने दो महिलाओ सविता बिरुआ (मंझारी, पश्चिम सिंहभूम) और बेलमति हेम्ब्रम (पासूहातू, चाईबासा मुफ़स्सिल) को रोका। शुरुआती पूछताछ में दोनों ने यह कहकर मामला दबाने की कोशिश की कि वह पांच लड़कियों उनकी सहेलियां हैं और किसी निजी काम से तमिलनाडु जा रही हैं।
लेकिन महिला आरपीएफ कर्मियों द्वारा सख़्त पूछताछ के बाद पूरी सच्चाई सामने आई। पूछताछ दोनों महिलाओं ने स्वीकार किया कि वह नौकरी का झांसा देकर नाबालिग लड़कियों को तमिलनाडु ले जा रही थीं और इसके बदले उन्हें पैसा मिलता था। जिसके बाद तुरंत ही आरपीएफ ने लड़कियों के परिजनों और चाइल्ड लाइन से संपर्क कर उन्हें सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की।
बचाई गई लड़कियों में तीन की उम्र 15 वर्ष और दो की उम्र 17 वर्ष बताई गई है। आरपीएफ यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये लड़कियां किन परिस्थितियों में तस्करों के जाल में फंसी। दोनों आरोपी महिलाओं को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए जीआरपी के हवाले कर दिया गया है और उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया जारी है।
आरपीएफ की समय पर की गई इस कार्रवाई से न केवल मानव तस्करी की गंभीर साजिश विफल हुई, बल्कि पांच नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित घर लौटाने में भी सफलता मिली है।