जमशेदपुर सहित पूरे कोल्हान क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां की हवा, पानी और वातावरण की बिगड़ती गुणवत्ता का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई दे रहा है। यहां की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि सांस, त्वचा और आंखों से संबंधित बीमारियों के इलाज पर हर साल लगभग 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहा है।
सांस संबंधी बीमारियों में तेज वृद्धि
विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ते वाहन, टूटी–फूटी सड़कें, उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की कमी और नालों के जरिए नदियों में पहुंच रहा कचरा ये सभी कारणों से प्रदूषण और बढ़ रहा हैं।
डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल में आने वाले मरीजों में 15–20% लोग सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। पहले चरण में दमा और ब्रोंकाइटिस की शिकायत रहती है, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर मामला गंभीर होकर सीओपीडी तक पहुंच जाता है।
दवा कारोबारियों के अनुसार एक इनहेलर की कीमत करीब 700 रुपये होती है, जो सिर्फ एक सप्ताह चलता है। गंभीर मरीजों को महीने में 7-8 इनहेलर तक खरीदने पड़ते हैं, जिससे उनका मासिक खर्च काफी बढ़ जाता है।
त्वचा और बालों की समस्याएं बढ़ीं
त्वचा विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रदूषित वातावरण और अस्वच्छ माहौल के कारण मुंहासे, चकत्ते, एलर्जी और हेयर फॉल के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है।
मुंहासों के उपचार में 300-500 रुपये की दवाइयां लगती हैं और यदि क्रीम का उपयोग तीन-चार महीने तक किया जाए तो खर्च 2–3 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। इसके अलावा टैबलेट पर अलग खर्च होता है।
दवा विक्रेताओं के अनुसार कोल्हान में करीब 50 हजार लोग प्रदूषणजनित बीमारियों से प्रभावित हो सकते हैं। यदि प्रति मरीज औसतन 1000 रुपये प्रतिमाह खर्च मानें, तो केवल दवाओं पर ही हर महीने लगभग 5 करोड़ रुपये और साल भर में 50–60 करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं।
आंखों की समस्याएं और दूषित पानी का खतरा
नेत्र विशेषज्ञों कहना है कि प्रदूषण बढ़ने से आंखों में जलन, खुजली और पानी आने जैसी समस्याएं बहुत आम हो गई हैं। अच्छी गुणवत्ता वाली आई ड्रॉप्स की कीमत 250–300 रुपये होती है और इन्हें महीने में कम से कम दो बार लेना पड़ता है। मार्केट में सस्ती दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन वह उतनी प्रभावी नहीं मानी जाती है।
इसके अलावा, दूषित पानी के सेवन से लीवर संबंधी बीमारियों के मामलों में भी वृद्धि हो रही है, जिनका इलाज अत्यधिक महंगा है। विभिन्न विभागों में हर साल मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो कोल्हान में प्रदूषण संकट की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।