Jamshedpur: टाटा स्टील की अधिकृत यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन के संविधान में संशोधन को मंगलवार को हरी झंडी दे दी गई। मंगलवार को आयोजित बैठक में 26 और 28 नवंबर को हुए विचार-विमर्श के आधार पर तैयार अंतिम संशोधित ड्राफ्ट को विस्तार से पढ़कर सुनाया गया। लगभग 90 प्रतिशत कमेटी सदस्यों ने बैठक में भाग लिया। महासचिव सतीश सिंह ने अपने सभी मिनट्स प्रस्तुत किए और संशोधन प्रस्ताव को पारित करने का आग्रह किया। इसके बाद कमेटी के सभी सदस्यों और पदाधिकारियों ने हाथ उठाकर संशोधन को मंजूरी दे दी।
संशोधित प्रस्ताव के अनुसार यूनियन की मौजूदा 214 कमेटी सीटों को घटाकर 160 किया जाएगा। साथ ही यह नियम जोड़ा गया है कि चुनाव का नोटिफिकेशन जारी होने के समय यूनियन के कुल सदस्यों की संख्या को 50 से विभाजित कर जितनी सीटें बनेंगी, उतनी सीटों पर चुनाव आयोजित होगा। हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सीटों की संख्या किसी भी स्थिति में 160 से कम नहीं होगी। कुल 54 सीटें कम करने का निर्णय औपचारिक रूप से स्वीकृत कर दिया गया।
अब तक यूनियन के चुनाव में बाहरी व्यक्ति, गैर-कर्मचारी, कर्मचारी या सेवानिवृत्त कर्मचारी कोई भी को-ऑप्ट होकर चुनाव लड़ सकता था। इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए तय किया गया है कि अब चुनाव में केवल वही उम्मीदवार हिस्सा ले सकेंगे जो कंपनी के कर्मचारी हो। को-ऑप्ट सदस्य भी केवल कर्मचारी या पूर्व कर्मचारी (रिटायर्ड सहित) ही बनाए जा सकेंगे।
इसके अलावा आईआर लेबर कोड 2020 के अनुसार भविष्य में होने वाले सभी संशोधनों को स्वतः यूनियन संविधान में शामिल माना जाएगा। नए संविधान में यह भी प्रावधान जोड़ा गया है कि पदाधिकारियों के चुनाव में किसी भी उम्मीदवार का नामांकन पत्र गलत भरने के आधार पर रद्द नहीं किया जाएगा।
पदाधिकारियों के चुनाव के लिए अब चार प्रस्तावक (Proposer) और चार समर्थक (Seconder) आवश्यक होंगे, जबकि कमेटी सदस्यों के चुनाव के लिए तीन प्रस्तावक और तीन समर्थक पर्याप्त होंगे। पहले यह संख्या इससे ज्यादा थी। साथ ही यह भी तय किया गया कि किसी भी सीट के रिक्त होने पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना अनिवार्य होगा।
संविधान संशोधन को तुरंत प्रभाव से मंजूरी दे दी गई है। अब इसे यूनियन की आमसभा (AGM) में प्रस्तुत किया जाएगा। AGM में पास होने के बाद ही संशोधन औपचारिक रूप से लागू माने जाएंगे, और ये बदलाव अगले कार्यकाल से प्रभावी होंगे।