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  • 2025-12-08

Jharkhand News: मदरसा शिक्षकों के पेंशन मामले में हाई कोर्ट सख्त, दो शीर्ष अधिकारियों को किया गया तलब

Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट में मदरसा शिक्षकों से जुड़े पेंशन और ग्रेच्युटी विवाद पर एक बार फिर सुनवाई हुई. अवमानना याचिका पर विचार करते हुए न्यायमूर्ति आनन्दा सेन की कोर्ट ने सरकार की ओर से आदेशों के पालन में देरी को गंभीर मुद्दा माना है. 

प्रधान सचिव और माध्यमिक शिक्षा के निदेशक को सशरीर हाजिर होने का निर्देश
अदालत ने मामले में दो शीर्ष अधिकारियों को नोटिस जारी किया है. प्रधान सचिव मानव संसाधन विभाग राहुल पुरवार और निदेशक माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है. कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि हाई कोर्ट के आदेश पालन न करने की स्थिति में उनके खिलाफ आरोप तय क्यों न किए जाएं.

आठ सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद होगी. वहीं प्रार्थी पक्ष ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने पहले एक संकल्प जारी कर कहा था कि वर्ष 2014 के बाद सेवानिवृत्त होने वाले मदरसा शिक्षकों को पेंशन और ग्रेच्युटी नहीं दी जाएगी. हालांकि हाई कोर्ट ने चौबीस अक्टूबर दो हजार चौदह को इस निर्णय को रद्द कर दिया था और स्पष्ट रूप से पेंशन तथा ग्रेच्युटी भुगतान का निर्देश दिया था.

प्रार्थियों का कहना है कि अदालत के इस पुराने आदेश का आज तक पालन नहीं किया गया है. शिकायत के बाद जब सरकार से जवाब मांगा गया था तो शपथ पत्र में कहा गया कि प्रार्थियों को भुगतान कर दिया गया है. लेकिन प्रार्थी पक्ष का दावा है कि न तो पेंशन मिली है और न ही ग्रेच्युटी की राशि उन्हें सौंपी गई है. इसी विवाद के समाधान के लिए मोहम्मद एजाबुल हक और अन्य की ओर से फिर से अवमानना याचिका दायर की गई है.

सरकार की प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर कई सवाल खड़े करता है यह मामला
यह मामला सरकार की प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर कई सवाल खड़े करता है. अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद सात वर्ष से अधिक समय बीत चुका है और भुगतान को लेकर अब भी मतभेद बना हुआ है. शपथ पत्र के दावे और प्रार्थियों की शिकायत एक दूसरे के विपरीत हैं, जिससे पता चलता है कि विभागीय समन्वय और जवाबदेही में गंभीर कमी है. हाई कोर्ट द्वारा अधिकारियों को व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश यह संकेत देता है कि न्यायालय अब इस मुद्दे पर कठोर रुख अपनाने के मूड में है. मदरसा शिक्षकों के हित से जुड़ा यह मामला बताता है कि प्रशासनिक ढीलापन किस तरह न्याय प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा कर देता है.
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