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  • 2025-12-09

Jharkhand News: शराब घोटाले में ED की पूछताछ, बिरसा मुंडा जेल में पांच आरोपितों से सवाल-जवाब

Jharkhand News: झारखंड शराब घोटाले की जांच में मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार पहुंची. ED ने यहां ACB द्वारा गिरफ्तार किये गए पांच आरोपितों से पूछताछ की है. टीम ने महेश सीताराम, परेश ठाकोर, विक्रम ठाकोर, बिपिन जाधवभाई परमार और जगन ठाकोर देसाई से कई अहम सवाल किए हैं. सभी आरोपित इस समय एसीबी द्वारा दर्ज कांड संख्या 9/25 में जेल में बंद हैं.

PMLA अदालत से मिली है ED को पूछताछ की अनुमति
ईडी ने इससे पहले पीएमएलए की विशेष अदालत से इन आरोपितों से पूछताछ की अनुमति मांगी थी. अनुमति मिलने के बाद टीम जेल पहुंची और आरोपितों से पूछताछ की प्रक्रिया पूरी की गई. जांच एजेंसी ने अदालत में बताया था कि एसीबी द्वारा PE-3/2024 की जांच पूरी होने के बाद दर्ज प्राथमिकी में बड़ा वित्तीय खेल सामने आया है. इसमें मेसर्स विजन हॉस्पिटलिटी एंड कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स मार्शन इनोवेटिव सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फर्जी बैंक गारंटी देकर शराब कारोबार में भारी नुकसान पहुंचाने की बात कही गई है.

जांच में यह सामने आया है कि VHSCPL ने 5.35 करोड़ और MISSPL ने 5.02 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी का इस्तेमाल किया था. VHSCPL के एमडी महेश सीताराम और निदेशक परेश ठाकोर, विक्रम ठाकोर और बिपिन जाधवभाई परमार इस मामले में आरोपी हैं. MISSPL के निदेशक जगन ठाकोर देसाई को भी एसीबी ने इसी केस में गिरफ्तार किया है.

IAS विनय चौबे समेत 10 लोग हैं आरोपी
एसीबी ने मई में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी. इस एफआईआर में वरीय आईएएस अधिकारी विनय चौबे और उत्पाद विभाग के संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह सहित 10 लोगों को आरोपी बनाया गया था. इसके बाद एसीबी ने विनय चौबे और गजेंद्र सिंह को हिरासत में लिया था. मामले में अब तक एक दर्जन से अधिक गिरफ्तारी हो चुकी है. कुछ आरोपितों को बेल मिल चुकी है जबकि एसीबी अपनी जांच आगे बढ़ा रही है.

वित्तीय लेनदेन और फर्जी बैंक गारंटी की खुल रही परतें
शराब घोटाले की जांच अब उस चरण में पहुंच चुकी है जहां वित्तीय लेनदेन और फर्जी बैंक गारंटी की परतें खुल रही हैं. ईडी की पूछताछ से यह संकेत मिलता है कि मनी ट्रेल और जवाबदेही की दिशा में जांच और गहरी हो सकती है. एसीबी और ईडी दोनों एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई से यह साफ है कि यह मामला प्रशासनिक स्तर से लेकर कॉर्पोरेट स्तर तक फैला हुआ है. आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं.
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