गैस के प्रभाव को कम किया जा रहा है
सीएमडी के अनुसार, गैस रिसाव का मूल कारण परित्यक्त भूमिगत सुरंगों में वर्षों से फंसी अवशिष्ट गैस है, जो धंसान और सतही दरारों से बाहर निकल रही है। बीसीसीएल ने डीजीएमएस, सिंफर, आईआईटी-आईएसएम और पीएमआरसी जैसी विशेषज्ञ एजेंसियों की मदद से रिसाव रोकने की वैज्ञानिक प्रक्रिया शुरू की है। प्रभावित क्षेत्रों में लगातार चूना, मिट्टी और पानी का छिड़काव कर गैस के प्रभाव को कम किया जा रहा है।
पुनर्वास पर तेज़ी जेआरडीए को 378.39 एकड़ भूमि का हस्तांतरण
सीएमडी ने बताया कि झरिया मास्टर प्लान के तहत पुनर्वास कार्य को गति देने के लिए बेलगड़िया मौजा की 378.39 एकड़ भूमि जेआरडीए को लीज पर सौंप दी गई है। प्रभावित परिवारों को 800 वर्गफुट के सुविधायुक्त पक्के मकान, सड़क, पानी, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और पशुओं के लिए केटल शेड की व्यवस्था की जा रही है।
अधिकारियों का दौरा, राहत कैंप में बढ़ाई जा रही सुविधाएँ
बीसीसीएल के डायरेक्टर (एचआर) मुरली कृष्ण रमैया ने केंदुआडीह के विभिन्न प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और राहत कैंप में व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया। उन्होंने खाने-पीने, अस्थायी शेल्टर, पेयजल और मेडिकल टीमों की व्यवस्था बढ़ाने का निर्देश दिया। मेडिकल टीम ने मंगलवार को 47 लोगों की जांच की, जबकि कई प्रभावित मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं।
प्रभावितों का गुस्सा पहले गैस रुके, फिर पुनर्वास पर बात
थाना परिसर में स्थानीय लोगों, बीसीसीएल प्रबंधन और प्रशासन के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक में कोई सहमति नहीं बन सकी। लोगों ने कहा कि जब तक गैस रिसाव पूरी तरह नहीं रुकेगा, तब तक पुनर्वास पर चर्चा नहीं की जाएगी।स्थानीय ग्रामीणों ने प्रबंधन पर भोजन और चिकित्सीय सुविधा में गड़बड़ी का भी आरोप लगाया।
कांग्रेस नेत्री अनुपमा सिंह भी पहुंचीं प्रभावित क्षेत्र
कांग्रेस नेत्री अनुपमा सिंह ने प्रभावित परिवारों से मिलकर कहा कि स्थिति गंभीर है और प्रशासन को जल्द से जल्द गैस रोकथाम के स्थायी उपाय करने चाहिए।